वाराणसी
मंशापुर का शौचालय बना उपेक्षा का शिकार, मरम्मत और संचालन की मांग तेज
वाराणसी। हरहुआ विकासखंड के राजस्व गांव मंशापुर में वर्षों पूर्व निर्मित चार सीटों वाला सार्वजनिक सुलभ शौचालय बदहाली का शिकार हो चुका है। स्वच्छता को प्रोत्साहित करने और खुले में शौच की समस्या के समाधान के उद्देश्य से बनाए गए इस शौचालय का लाभ ग्रामीणों को अब तक नहीं मिल पाया है।
वर्ष 2018 में तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान चंदौली सांसद डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने इस शौचालय का लोकार्पण किया था। इसका निर्माण कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की सामाजिक दायित्व योजना (सीएसआर) के तहत सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन द्वारा लाखों रुपये की लागत से कराया गया था।
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण के बाद से ही शौचालय की देखरेख के लिए कोई स्थायी केयरटेकर नियुक्त नहीं किया गया। पूर्व प्रधान द्वारा कुछ समय के लिए एक केयरटेकर रखा गया था, लेकिन भुगतान न मिलने के कारण उसने कार्य छोड़ दिया। इसके बाद से शौचालय पर अधिकतर समय ताला लटका रहता है और आमजन इसका उपयोग नहीं कर पाते।

वर्तमान स्थिति यह है कि शौचालय केवल शादी-विवाह जैसे आयोजनों के दौरान ही खोला जाता है, जबकि सामान्य दिनों में यह बंद रहता है। भीतर बिजली के बोर्ड टूटे पड़े हैं, दीवारें गंदगी से भरी हैं और नियमित सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। अंदर मच्छरों की भरमार होने से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि लाखों रुपये की यह सरकारी योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र मरम्मत और नियमित संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि आम लोगों को इसका लाभ मिल सके।
इस संबंध में पूर्व प्रधान अनिल सिंह ने बताया कि निर्माण के बाद से कोई स्थायी केयरटेकर नहीं रखा जा सका। कुछ समय के लिए एक व्यक्ति को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन आय का स्रोत न होने के कारण उसने काम छोड़ दिया।
