वाराणसी
UP College : सूर्य प्रताप हत्याकांड में प्राचार्य की सफाई, आरोपों को बताया बेबुनियाद
वाराणसी। शहर के उदय प्रताप कॉलेज में 20 मार्च को छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या के छह दिन बाद प्राचार्य डॉ. डीके सिंह ने सामने आकर अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना अत्यंत दुखद है और संस्थान इस हादसे से आहत है, लेकिन उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं।
प्राचार्य के अनुसार, घटना वाले दिन सुबह 11 बजकर 02 मिनट पर वह विज्ञान संकाय के पोर्टिको में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मौजूद थे। इसी दौरान लगभग 11 बजकर 10 मिनट पर अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। मौके पर पहुंचने पर छात्र सूर्य प्रताप सिंह जमीन पर घायल अवस्था में पड़े मिले। उन्होंने बताया कि 11 बजकर 15 मिनट पर शिवपुर थाना को सूचना देने के लिए कॉल किया गया, जहां चार बार प्रयास के बाद संपर्क हो सका।
डॉ. डीके सिंह ने कहा कि घायल छात्र को तुरंत अस्पताल भेजा गया और यह पूरी प्रक्रिया कॉलेज के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड है, जिसकी फुटेज पुलिस को उपलब्ध करा दी गई है। उन्होंने इस बात का भी खंडन किया कि घटना के बाद वह मौके से भाग गए थे। उनके मुताबिक, उनकी ही गाड़ी से सूर्य प्रताप को अस्पताल भेजा गया, जिसमें शिक्षक मनोज कुमार सिंह, तीन छात्र और चालक भी मौजूद थे।
प्राचार्य ने बताया कि आरोपी छात्र मंजीत कुमार चौहान लगातार फायरिंग कर रहा था और यदि प्राक्टोरियल बोर्ड के सदस्य समय पर नहीं पहुंचते, तो और भी लोगों की जान जा सकती थी। वहीं छात्रों द्वारा लगाए गए इस आरोप को भी उन्होंने गलत बताया कि सूर्य प्रताप को उन्होंने फोन करके बुलाया था। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ऐसा कोई कॉल रिकॉर्ड है तो वह प्रस्तुत कर सकता है। उनके अनुसार, उस दिन मिडटर्म बैक का फॉर्म भरा जा रहा था, संभवतः उसी कारण छात्र कॉलेज आया होगा।
घटना के कारणों को लेकर प्राचार्य ने कहा कि दोनों छात्रों के बीच क्या विवाद था, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल शर्ट की बांह मोड़ने जैसी बात को लेकर इतनी बड़ी घटना होना संभव नहीं लगता।
आरोपी मंजीत चौहान की गिरफ्तारी हो चुकी है और वह जेल में है। प्राचार्य ने बताया कि कॉलेज खुलने पर प्राक्टोरियल बोर्ड की बैठक बुलाकर आरोपी को स्थायी रूप से निष्कासित किया जाएगा, साथ ही अन्य दोषियों पर भी कार्रवाई होगी। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को लेकर उन्होंने कहा कि यदि कोई गलत जानकारी प्रसारित करता है और वह सीसीटीवी तथ्यों से मेल नहीं खाती, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्रों के नाम संदेश देते हुए प्राचार्य ने अपील की कि सभी छात्र अपने पठन-पाठन पर ध्यान दें और किसी भी असंवैधानिक गतिविधि से दूर रहें। मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए और सभी को मिलकर पढ़ाई करनी चाहिए।
घटना के दिन, 20 मार्च को करीब 11 बजे बीएससी के छात्र सूर्य प्रताप सिंह, जो लगभग 20 दिन बाद कॉलेज पहुंचे थे, की बीए सेकेंड ईयर के छात्र मंजीत सिंह चौहान ने परिसर में ही गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी पिस्टल कूड़े के ढेर में फेंककर फरार हो गया और पहचान से बचने के लिए छत से कूद गया, जिससे उसका पैर टूट गया। इसके बाद वह एयरपोर्ट रोड की ओर भागा, ई-रिक्शा से गिलट बाजार चौराहे तक पहुंचा और फोन बंद कर लिया। घायल होने के कारण वह शहर से बाहर नहीं निकल सका।
घटना के बाद आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की। पुलिस ने करीब चार घंटे बाद हालात पर काबू पाया और छात्रों व शिक्षकों को सुरक्षित बाहर निकाला। पथराव में तीन प्रोफेसर घायल हुए, जबकि पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।
मृतक सूर्य प्रताप सिंह, गाजीपुर के निवासी थे और पढ़ाई में मेधावी माने जाते थे। उन्होंने इंटरमीडिएट प्रथम श्रेणी से पास करने के बाद बीएससी मैथ में प्रवेश लिया था और आगे एमएससी कर शोध करना चाहते थे। उनके पिता ऋषि देव सिंह लखनऊ में ट्रैवल एजेंसी में चालक हैं, जबकि मां किरण सिंह एक स्कूल में सहायिका हैं। परिवार में दो बहनें हैं।
आरोपी मंजीत चौहान, वाराणसी के चांदमारी क्षेत्र का निवासी है और बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। उसके खिलाफ पहले से भी शिवपुर थाना में मुकदमा दर्ज है, जबकि उसके साथी अनुज सिंह पर भी कई मामले दर्ज बताए जाते हैं। फिलहाल अनुज फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
