गाजीपुर
जो रमजान को छोड़ता है, वह दीन को छोड़ता है : डॉ. वसीम रजा अंसारी
गाजीपुर (जयदेश)। राष्ट्रीय मानवाधिकार एण्ड एंटी करप्शन मिशन गाजीपुर ने रमजान शरीफ के बारे में बताया कि रमज़ान इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। यह महीना आत्मसंयम, इबादत, त्याग, धैर्य और मानवता की सेवा का संदेश देता है। इसी महीने में पवित्र ग्रंथ क़ुरआन शरीफ़ का अवतरण हुआ था, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। रमज़ान में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। इस दौरान भोजन, पानी और अन्य सांसारिक इच्छाओं से दूर रहकर ईश्वर की इबादत की जाती है। रोज़ा केवल भूखे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह मन, वाणी और कर्म को पवित्र बनाने का अभ्यास है।
नमाज़ और इस महीने में नमाज़, तिलावत, दुआ और तौबा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। रात की विशेष नमाज़ ‘तरावीह’ रमज़ान की पहचान है। लोग अधिक से अधिक समय अल्लाह की इबादत में लगाते हैं, जिससे आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
दान और सेवा भावना रमज़ान का महीना गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता का भी प्रतीक है। इस दौरान ज़कात, सदका और फित्रा दिया जाता है। इससे समाज में भाईचारा, समानता और करुणा की भावना विकसित होती है।
नैतिकता और चरित्र निर्माण रमज़ान इंसान को सच्चाई, ईमानदारी, धैर्य और संयम का पाठ पढ़ाता है। इस महीने में क्रोध, झूठ, निंदा और बुरे विचारों से बचने का विशेष प्रयास किया जाता है। यही गुण व्यक्ति के चरित्र को मजबूत बनाते हैं।
इस्लाम के अंतिम पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद साहब ने रमज़ान को रहमत, बरकत और मग़फिरत का महीना बताया है। उन्होंने इस महीने में अधिक से अधिक इबादत और नेक कार्य करने की प्रेरणा दी।
ईद-उल-फित्र का संदेश रमज़ान के अंत में ईद-उल-फित्र का पर्व मनाया जाता है, जो खुशी, आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। यह त्योहार त्याग और इबादत के बाद मिलने वाले इनाम की तरह होता है।
रमज़ान केवल एक धार्मिक महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सेवा और नैतिक जीवन का संदेश है। यह हमें बेहतर इंसान बनने, समाज में प्रेम और शांति फैलाने की प्रेरणा देता है। हमें चाहिए कि रमज़ान की शिक्षाओं को अपने पूरे जीवन में अपनाएँ और मानवता की सेवा में योगदान दें।
