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गोरखपुर

एक चेहरा, चार पहचान; गोरखपुर में सामने आया फर्जी पासपोर्ट कांड

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फर्जी पासपोर्ट से विदेश यात्रा का खुलासा, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट

गोरखपुर। जिले के गोला थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा चार अलग-अलग नाम और पहचान से पासपोर्ट बनवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी ने इन पासपोर्टों से विदेश यात्रा भी की। पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

एक व्यक्ति, चार पहचान, चार पासपोर्ट
पुलिस जांच में सामने आया है कि बरईपुर रामरूप निवासी शरद मिश्रा ने सुनियोजित तरीके से वर्ष 2002, 2015, 2016 और 2022 में चार अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए। आरोपी ने हर बार अपनी पहचान बदलते हुए शरद कुमार, चरद मिश्रा, शरवन कुमार और हृदयनाथ मिश्रा जैसे नामों का उपयोग किया। यही नहीं, प्रत्येक आवेदन में जन्मतिथि और पता भी अलग-अलग दर्ज कराया गया।

भौतिक सत्यापन में हुआ बड़ा खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए गोला थाना पुलिस ने जब भौतिक सत्यापन कराया तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि चारों पासपोर्ट एक ही व्यक्ति के हैं। फोटो, शारीरिक पहचान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पुष्टि की कि सभी दस्तावेजों के पीछे एक ही व्यक्ति शामिल है।

विदेश यात्रा और लंबे समय तक निवास
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने इन फर्जी पासपोर्टों का उपयोग कर कई बार विदेश यात्रा की। इतना ही नहीं, वह लंबे समय तक विदेश में निवास भी करता रहा। इस तथ्य ने मामले को और अधिक संवेदनशील बनाया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

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गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
प्रथम दृष्टया यह मामला छल, जालसाजी, कूटरचना और सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ की श्रेणी में आता है। गोला थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 12 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है

बहुस्तरीय जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की गहन और बहुस्तरीय जांच जारी है। जांच के दायरे में पासपोर्ट कार्यालय से जुड़े दस्तावेज़, आवेदन प्रक्रिया, सत्यापन रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को भी खंगाला जा रहा है। साथ ही आरोपी की विदेश यात्राओं और वहां के रिकॉर्ड को भी जुटाया जा रहा है

संगठित गिरोह या मिलीभगत की आशंका
अधिकारियों को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे किसी संगठित गिरोह या अंदरूनी मिलीभगत की भूमिका हो सकती है। जांच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बार पहचान बदलकर पासपोर्ट बनवाना कैसे संभव हुआ और इसमें किन-किन लोगों की लापरवाही या संलिप्तता रही।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठे सवाल
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस प्रकरण से जुड़े और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

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