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गोरखपुर

श्रद्धालुओं ने सुना श्रीकृष्ण–रुक्मणी विवाह का दिव्य प्रसंग

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गोरखपुर। गोरहडिह ग्राम पंचायत में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिवस कथावाचक सत्यव्रत मणि उपाध्याय ‘चंदन बाबा’ ने श्रीकृष्ण और रुक्मणी विवाह का पवित्र प्रसंग सुनाया। भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं और महारास के वर्णन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विह्वल कर दिया।

कथा के दौरान कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ नरेश की सुपुत्री रुक्मणी से हुआ था। श्रीकृष्ण ने रुक्मणी का हरण कर उनका वरण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रुक्मणी स्वयं लक्ष्मी स्वरूपा हैं और नारायण से कभी पृथक नहीं रह सकतीं।

चंदन बाबा ने श्रीकृष्ण लीलामृत में वर्णित महारास का भी विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि महारास, जीवात्मा और परमात्मा के अद्वैत मिलन का प्रतीक है—जीव और ब्रह्म तत्व का यह संगम ही महारास कहलाता है।

कथा व्यास ने यह भी कहा कि जब जीव अभिमान से भर जाता है तो वह भगवान से दूर होने लगता है, किंतु जो भक्त हृदय से श्रीकृष्ण के प्रति अनुराग रखता है, उस पर भगवान विशेष कृपा बरसाते हैं और उसे अपने दिव्य दर्शन का सौभाग्य देते हैं।

श्रीकृष्ण–रुक्मणी विवाह की सजीव झांकी ने भी श्रद्धालुओं में गहन भक्ति और भावनात्मक उल्लास उत्पन्न किया। कार्यक्रम में मुख्य यजमान रामकरन सिंह, डॉक्टर सुनील सिंह, अवधेश यादव, ग्राम प्रधान गिजेश यादव, प्रधान प्रत्याशी बीनू मद्धेशिया, महेंद्र यादव, चंद्रसेन यादव सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।

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