वाराणसी
भोले की नगरी में गूंजेगा राधे-राधे
वाराणसी। बाबा भोलेनाथ की नगरी इन दिनों भक्ति रस से सराबोर है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के भव्य उत्सव के बाद अब काशीवासी राधाष्टमी महोत्सव की तैयारियों में जुट गए हैं। मथुरा, वृंदावन और बरसाने की भांति राधा रानी के प्रेम की गूंज गली-गली और मोहल्लों में सुनाई देने लगी है।
तीन दिवसीय भव्य महोत्सव का आयोजन
हरे रामा हरे कृष्णा संकीर्तन सोसायटी, जो पिछले 23 वर्षों से काशी में राधाष्टमी का आयोजन करती आ रही है, इस बार भी माहेश्वरी भवन में भव्य तीन दिवसीय महोत्सव आयोजित कर रही है। संस्था के संयोजक कृष्ण प्रसाद दास प्रभु ने बताया कि राधा और श्याम का प्रेम जीवन का सबसे बड़ा रस है। राधा के बिना श्याम अधूरे हैं और श्याम के बिना राधा। इसी भावना के साथ संस्था ने दो दशक से अधिक पहले काशी में राधाष्टमी मनाने की परंपरा शुरू की थी।
संस्था के महामंत्री मुकेश प्रभु का कहना है कि राधा-कृष्ण का प्रेम जीवन का प्रेरणास्रोत है, क्योंकि बिना प्रेम के जीवन अधूरा है। इस वर्ष राधाष्टमी महोत्सव 30 अगस्त से 1 सितम्बर तक आयोजित किया जाएगा। प्रतिदिन राधा गोविंद देव, जगन्नाथ बलदेव और सुभद्रा जी के विग्रहों का श्रृंगार किया जाएगा। साथ ही तुलसी महारानी की पूजा, चैतन्य महाप्रभु की आरती और सामूहिक हरे कृष्ण महामंत्र कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय रहेगा।
31 अगस्त का विशेष आयोजन
31 अगस्त को महोत्सव दो चरणों में सम्पन्न होगा। दोपहर 12 बजे महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को राधा रानी के चरण दर्शन का अवसर मिलेगा। शाम को 108 व्यंजनों का भोग अर्पण किया जाएगा।
समापन समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम
1 सितम्बर को समापन समारोह में सामूहिक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी, जिसका निर्देशन वंदना जायसवाल करेंगी। इसके अलावा भव्य भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।
महोत्सव में राघवेन्द्र प्रभु, मुकेश प्रभु, संजय प्रभु, गोपी प्रभु और दीनदयाल प्रभु सहित अनेक श्रद्धालु सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। तीन दिनों तक काशी भक्ति, भजन और प्रेम की अनुपम धारा में डूबे रहने वाली है।
