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वाराणसी

बीएचयू पर संसदीय समिति का शिकंजा, 200 सवालों में मांगा 5 साल का बजट

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कंप्यूटर सेंटर की खरीद पर जवाब तलब

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 19 पेज में फैले 40 बिंदुओं पर लगभग 200 सवाल भेजे हैं। समिति ने पांच वर्षों के बजट विवरण, कंप्यूटर सेंटर में की गई खरीदारी, ट्रॉमा सेंटर की स्थिति, पेड़ कटाई और अस्पताल प्रशासन से जुड़े अहम मुद्दों पर दस्तावेजों के साथ जवाब तलब किया है।

संसदीय समिति ने स्पष्ट किया है कि बीएचयू अधिनियम के अंतर्गत कोई व्यक्ति कितने प्रशासनिक पदों को संभाल सकता है और क्या एक से अधिक पद पर बने रहना वैधानिक रूप से स्वीकार्य है। विश्वविद्यालय में स्थायी कुलसचिव की अनुपस्थिति, कार्यवाहक कुलपति की निरंतर नियुक्ति, पिछले पांच सालों में नियुक्तियों की प्रक्रिया और अधूरे मामलों की स्थिति जैसे सवाल भी सूची में शामिल हैं।

विवादों के केंद्र में रहे इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (IOE) फंड से हुई सलाहकारों की नियुक्ति, उनके कार्य और भुगतान की स्थिति को लेकर भी समिति ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा आउटसोर्सिंग से रखे गए कर्मचारियों, इलाज और फार्मेसी के निजीकरण, छात्र कल्याण योजनाओं, गिरे हुए पेड़ों की संख्या और छात्रावास निर्माण की प्रगति पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।

समिति ने जानना चाहा है कि क्या इन सभी नियुक्तियों के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया था और यदि हां, तो उसकी प्रति प्रस्तुत की जाए। साथ ही यह भी पूछा गया है कि अंतिम बार नियमित कुलपति ने कब पद छोड़ा था और वर्तमान में नियुक्त कुलपति की स्थिति क्या है।

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इस उच्चस्तरीय जांच के बाद बीएचयू प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय कार्यालय द्वारा हर सवाल के जवाब के साथ दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस व्यापक जांच में कितना पारदर्शिता बरतता है।

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