वाराणसी
कैंसर पीड़ित बुजुर्ग को भतीजे ने घर से निकाला, आश्रम बना आखिरी सहारा
वाराणसी। इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आयी है, जहां एक बुजुर्ग को उनके ही भतीजे ने ठुकरा दिया। कैंसर से जूझ रहे इस बुजुर्ग को जब अपनों ने अपनाने से इनकार कर दिया, तब आश्रम ने उन्हें सहारा दिया।
बेसहारा पड़े मिले बुजुर्ग, समाजसेवी ने संभाला
मिली जानकारी के मुताबिक, वाराणसी के कबीरचौरा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर एक बुजुर्ग कई दिनों से लाचार हालत में पड़े थे। समाजसेवी अमन कबीर को सूचना मिली कि एक बुजुर्ग सड़क पर बेसुध अवस्था में हैं। जब उन्होंने वहां पहुंचकर देखा, तो पाया कि बुजुर्ग के गले में कैंसर का बड़ा ट्यूमर था। उनकी हालत बहुत खराब थी और वह बेबस होकर लोगों से मदद मांग रहे थे। उनके हाथ में मात्र 200 रुपये थे और वह किसी से कह रहे थे कि उन्हें घर छोड़ दिया जाए।

समाजसेवी अमन कबीर
जब अमन कबीर ने बुजुर्ग से उनके घरवालों का संपर्क पूछा, तो उन्होंने अपने भतीजे बबलू जायसवाल का नाम बताया। अमन ने जब बबलू से फोन पर संपर्क किया, तो उसने आने का वादा किया, लेकिन वह नहीं आया।
इसके बाद अमन कबीर ने बुजुर्ग को अपनी एम्बुलेंस सेवा के जरिए उनके बताए पते पर पहुंचाया। लेकिन जब वहां पहुंचे, तो भतीजे ने उन्हें अपनाने से इनकार कर दिया। समाजसेवी अमन कबीर ने बताया कि उन्होंने जब बबलू से यह सब करने की वजह पूछी तब बबलू जायसवाल ने बताया कि “मेरे चाचा जी पिछले 35 सालों से परिवार से अलग रह रहे थे। उनकी शादी मिर्जापुर के चुनार में हुई थी, लेकिन वह वहां से सोनभद्र के अनपरा चले गए और फिर वाराणसी के मंडुआडीह में किराए के मकान में रहने लगे। उन्होंने इस दौरान हमसे या हमारे पिता से कोई संपर्क नहीं किया।”
बबलू ने आगे कहा कि “8 साल पहले मेरे पिता की मौत हुई थी, लेकिन चाचा जी तब भी नहीं आए। कुछ महीने पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो गया, तब वह भटकते हुए हमारे पास आए, लेकिन कैंसर के मरीज होकर। हमारे पास न तो जगह है और न ही इतनी आमदनी कि उनका इलाज कर सकें। इसलिए हमने उन्हें आश्रम भेज दिया।”

बबलू जायसवाल (भतीजा)
जब बुजुर्ग को उनके घर में जगह नहीं मिली, तो किसी तरह उन्हें वाराणसी के प्रसिद्ध आश्रम “अपना घर” में भेजा गया। रात में एक ऑटो रिक्शा आश्रम के बाहर आकर रुका, बुजुर्ग को उतारा और फिर चालक तुरंत वहां से भाग गया। यह पूरी घटना आश्रम के CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। सिक्योरिटी गार्ड ने जब फुटेज देखा, तो तुरंत आश्रम के डॉ. के. निरंजन को सूचित किया।
डॉ. निरंजन ने बताया कि जब उन्होंने बुजुर्ग को अंदर लाया, तो उनकी हालत बहुत खराब थी। उनकी गले में कैंसर की गंभीर समस्या थी और वह दर्द से कराह रहे थे।

“अपना घर” आश्रम बना आखिरी सहारा
फिलहाल, डॉ. के. निरंजन और उनकी टीम बुजुर्ग का इलाज करवा रही है। उनके लिए दवाइयां और खानपान की व्यवस्था की जा रही है। डॉ. निरंजन ने बताया कि “शंभुनाथ जी अब आश्रम में अन्य बुजुर्गों के साथ रह रहे हैं। उनकी देखभाल की जा रही है और मेडिकल जांच भी करवाई जा रही है।”
