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गाजीपुर

राजकीय हाई स्कूलों पर मर्जर का संकट, शिक्षकों की कमी से गिरा नामांकन

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गाजीपुर। जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालय भी अब शिक्षकों और छात्रों की कमी से जूझ रहे हैं। कम नामांकन इन विद्यालयों के लिए चिंता का विषय बन गया है। प्राथमिक विद्यालयों की तरह कहीं राजकीय स्कूलों के मर्जर की प्रक्रिया न शुरू हो जाए, इसे लेकर विद्यालयों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। चट्टी-चौराहों से लेकर चाय-पान की दुकानों तक पर कम नामांकन वाले इन स्कूलों की चर्चा आम हो चली है।

जानकारी के अनुसार, जिले में कम नामांकन वाले राजकीय हाई स्कूलों की संख्या आधा दर्जन के करीब बताई जा रही है। यदि यह सच निकला तो इन स्कूलों का मर्जर होना तय माना जा रहा है। ऐसे स्कूलों में राजकीय हाई स्कूल सदरजहांपुर, मधुबन, रामपुर बलभद्र, भिक्खेपुर, गोंडी और कनुआन का नाम लिया जा रहा है।

प्रदेश स्तर पर 436 राजकीय हाई स्कूल ऐसे हैं जहां छात्रों की संख्या 50 से कम है, जबकि 189 राजकीय इंटर कॉलेजों में 100 से कम नामांकन हुए हैं। कम नामांकन पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने चिंता जताते हुए सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को नामांकन दर बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं। वर्तमान में एक से 15 जुलाई तक ‘दूसरे चक्र का स्कूल चलो अभियान’ चलाया जा रहा है। यदि इन स्कूलों ने छात्रों की संख्या बढ़ा ली तो मर्जर का संकट फिलहाल टल सकता है।

जिले में कुल 16 राजकीय हाई स्कूल संचालित हैं, जिनमें सात स्कूलों में प्रधानाचार्य का पद रिक्त है। इनका प्रभार सहायक अध्यापक संभाल रहे हैं। शिक्षकों की कमी भी इन विद्यालयों की बड़ी समस्या है। अभिभावकों का कहना है कि गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, और छात्रों को बिना तैयारी के ही परीक्षा देनी पड़ती है।

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, राजकीय हाई स्कूल रेवतीपुर, कटरिया, बिरनो और भिक्खेपुर में तीन-तीन शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि खानपुर और बहलोलपुर में चार-चार शिक्षक हैं। वयेपुर देवकली में पांच शिक्षक तैनात हैं। हाई स्कूल में छह विषय पढ़ना अनिवार्य होने के कारण कम से कम छह शिक्षकों की आवश्यकता होती है।

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राजकीय हाई स्कूल बिरनो के प्रधानाचार्य जय प्रकाश गुप्ता और कटरिया के प्रधानाचार्य सुधीर कुमार विश्वास ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण ही छात्रों की संख्या घट रही है। यदि जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई तो मर्जर की आशंका गहराना तय है।

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