गाजीपुर
पशु तस्करी किसानों के लिए बड़ा खतरा, जागरूकता और सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय
एक किसान के लिए पशु चलती-फिरती संपत्ति, चोरी और तस्करी से हो रहा भारी आर्थिक नुकसान
गाजीपुर | ग्रामीण भारत में पशुधन केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि किसानों की सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में से एक है। गाय, भैंस और बैल जैसे पशु किसानों की आय, कृषि कार्य और परिवार के भरण-पोषण का प्रमुख आधार होते हैं। ऐसे में पशु चोरी और तस्करी की बढ़ती घटनाएं किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
पशु तस्करी से किसानों को होता है दोहरा नुकसान
पशु तस्करी न केवल एक दंडनीय अपराध है, बल्कि यह किसानों की आर्थिक स्थिति को भी गहरा आघात पहुंचाती है। एक दुधारू पशु के चोरी हो जाने या तस्करी का शिकार बनने से किसान को हजारों या लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह नुकसान कई बार असहनीय साबित होता है।
दूध उत्पादन, कृषि कार्य और जैविक खाद जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में पशुओं की भूमिका होने के कारण उनकी अनुपस्थिति सीधे किसान की आय को प्रभावित करती है।
ग्रामीण क्षेत्रों को बना रहे हैं निशाना
अक्सर पशु तस्कर ऐसे गांवों को निशाना बनाते हैं जहां सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत कमजोर होती है। रात के अंधेरे में पशुओं की चोरी कर उन्हें दूसरे जिलों या राज्यों में पहुंचा दिया जाता है। कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों और परमिट का इस्तेमाल कर पशुओं के परिवहन को वैध दिखाने का प्रयास भी किया जाता है।
अमानवीय तरीके से ढोए जाते हैं पशु
तस्करी के दौरान पशुओं को वाहनों में क्षमता से अधिक संख्या में भर दिया जाता है। पर्याप्त जगह, पानी और हवा न मिलने के कारण कई पशु रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि पशु क्रूरता का भी गंभीर मामला है।
गांवों में बढ़ रही असुरक्षा की भावना
पशुओं की लगातार हो रही चोरी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है। किसान रात-रात भर जागकर अपने पशुओं की रखवाली करने को मजबूर हैं। वहीं कई बार वैध रूप से पशु बाजार ले जाने वाले किसानों को भी संदेह की दृष्टि से देखा जाता है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सिर्फ पुलिस नहीं, समाज की भी है जिम्मेदारी
पशु तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। ग्रामीणों को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को देनी चाहिए तथा पशुपालकों को अपने पशुओं की पहचान, सुरक्षा और निगरानी के प्रति सजग रहना चाहिए।
जागरूकता से ही रुकेगी तस्करी
पशु तस्करी को रोकना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। कुछ पैसों के लालच में बेजुबान पशुओं की तस्करी न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी सीधा प्रहार है। जागरूक समाज, सतर्क किसान और प्रभावी कानून व्यवस्था मिलकर ही इस समस्या पर अंकुश लगा सकते हैं।
