गोरखपुर
कैथौली की लालेश्वरी दुर्गा माता के दरबार में उमड़ते हैं श्रद्धालु, नवरात्र में बढ़ती है भीड़
1984 में स्वप्न में मिले माता के आदेश के बाद मुरारी लाल श्रीवास्तव ने कराया मंदिर का निर्माण, दूर-दराज से दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं भक्त
गोलाबाजार, गोरखपुर जयदेश। गोला तहसील क्षेत्र के ग्रामसभा बरईपुरा उर्फ पड़ौली के कैथौली टोले में स्थित मां लालेश्वरी दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां वर्षभर भक्त दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र के दिनों में श्रद्धालुओं की भीड़ विशेष रूप से बढ़ जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से मां के दरबार में पहुंचने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
गोला ब्लॉक मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर उत्तर गोला-कौड़ीराम मार्ग पर सड़क के पश्चिमी किनारे स्थित कैथौली टोले में इस मंदिर की स्थापना का इतिहास भी रोचक है। मंदिर के संस्थापक मुरारी लाल श्रीवास्तव केंद्रीय गुप्तचर विभाग में कार्यरत थे। मूल रूप से सिकरीगंज थाना क्षेत्र के भूमिधर गांव के निवासी मुरारी लाल अपने मामा रामलोचन श्रीवास्तव के पास कैथौली में रहते थे।
स्वप्न में मिला था मंदिर निर्माण का आदेश
मुरारी लाल श्रीवास्तव के अनुसार, 5 मई 1984 को जब वह इलाहाबाद में तैनात थे, तब उन्हें स्वप्न में मां वैष्णो देवी के दर्शन हुए। उन्होंने बताया कि स्वप्न में माता ने उनका नाम लेकर पुकारा और जल्द अपने स्थान पर आने को कहा। इसके बाद 8 मई 1984 को वह अपने विभागीय अधिकारी केएन श्रीवास्तव के साथ वैष्णो देवी पहुंचे।
मुरारी लाल के मुताबिक, रात में दर्शन-पूजन के बाद वह पुलिस गेस्ट हाउस में सो रहे थे, तभी उन्हें दोबारा स्वप्न आया। इसमें माता ने उन्हें अपने पैतृक गांव में मंदिर बनवाने का निर्देश दिया। इसके बाद उन्होंने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया और गांव लौट आए।
1994 में हुई मंदिर की स्थापना
मंदिर निर्माण के लिए मुरारी लाल श्रीवास्तव ने 1984 से 1994 तक प्रयास किया। आखिरकार 16 मई 1994 को कैथौली में मंदिर की स्थापना हुई। इसके बाद 12 मई 1997 को मंदिर में मां दुर्गा की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई। 30 जून 1995 को सेवानिवृत्त होने के बाद मुरारी लाल ने अपना जीवन माता की सेवा में समर्पित कर दिया।
मंदिर की स्थापना के बाद आसपास के गांवों में मां लालेश्वरी के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई। धीरे-धीरे मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई और गोरखपुर के आसपास के जनपदों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आने लगे।
नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना
मंदिर में पूजा-पाठ और देखरेख की जिम्मेदारी बगल के गांव के पुजारी पंडित प्रमोद नारायण शुक्ल संभालते हैं। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां के दर्शन करने के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मन्नतें मांगते हैं। भक्त मंदिर में कथा और कढ़ाई भी चढ़ाते हैं।
मंदिर के संस्थापक मुरारी लाल श्रीवास्तव का कुछ वर्ष पूर्व निधन हो गया। अब उनके परिवार के सदस्य मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे हैं। मां लालेश्वरी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी कायम है और नवरात्र में मंदिर परिसर भक्तों के जयकारों से गूंज उठता है।
