गाजीपुर
पितृ विसर्जन पर अवकाश नहीं, लोगों में नाराजगी
धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रमुख पर्वों को अवकाश सूची में शामिल करने की मांग
नंदगंज (गाजीपुर)। पितृ विसर्जन के अवसर पर विद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में अवकाश नहीं दिए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है। लोगों ने प्रदेश सरकार से हिंदू धर्म की आस्था और भारतीय संस्कृति से जुड़े प्रमुख पर्वों पर भी ध्यान देने की मांग की है। उनका कहना है कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की बात करने वाली सरकार को इन पर्वों के महत्व को भी समझना चाहिए।
पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का पर्व
लोगों के अनुसार, पितृ पक्ष का अंतिम दिन पितृ विसर्जन के रूप में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवसर पर हिंदू परिवार अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हैं। गंगा सहित विभिन्न नदियों, सरोवरों और तालाबों के किनारे पिंडदान, तर्पण और जल अर्पित कर पितरों को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का अहम हिस्सा है।
अवकाश नहीं होने से धार्मिक कार्यों में परेशानी
लोगों ने सवाल उठाया कि जब सरकार भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की बात करती है, तो पितृ विसर्जन जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर पर विद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में अवकाश क्यों नहीं दिया गया? उनका कहना है कि अवकाश सूची में इस पर्व को शामिल नहीं किए जाने से नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों के परिवारों को धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में असुविधा हो सकती है।
सभी धार्मिक परंपराओं के सम्मान की मांग
कुछ लोगों ने अन्य समुदायों के पर्वों पर मिलने वाले अवकाश का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी धर्मों और समुदायों की आस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। सरकार को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण पर्वों के प्रति समान संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की कि हिंदू धर्म की आस्था से जुड़े प्रमुख पर्वों को भी अवकाश सूची में उचित स्थान दिया जाए, ताकि लोग अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन सुविधापूर्वक कर सकें। उनका कहना है कि संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए उनसे जुड़े महत्वपूर्ण पर्वों पर भी समुचित ध्यान देना जरूरी है।
