गोरखपुर
देवरिया में स्टांप मूल्यांकन की गड़बड़ी उजागर, डीएम के निरीक्षण से मचा हड़कंप
सोनूघाट क्षेत्र की दो संपत्तियों का स्थलीय सत्यापन, एक में मिली मूल्यांकन की कमी; डीएम ने दिए नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश
देवरिया। जमीन की खरीद-फरोख्त और स्टांप शुल्क के मूल्यांकन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। मंगलवार, 13 अक्टूबर को जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ देवरिया-सलेमपुर मार्ग स्थित सोनूघाट क्षेत्र में दो विक्रय संपत्तियों का औचक स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान एक संपत्ति का स्टांप मूल्यांकन निर्धारित नियमों के अनुरूप मिला, जबकि दूसरी संपत्ति के मूल्यांकन में कमी सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मौके पर पहुंचकर किया भौतिक सत्यापन
जिलाधिकारी ने संपत्तियों के अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया। निरीक्षण का उद्देश्य यह जांचना था कि जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान निर्धारित मानकों के अनुसार मूल्यांकन किया गया है या नहीं और देय स्टांप शुल्क का भुगतान नियमानुसार हुआ है या नहीं। अचानक हुए इस निरीक्षण से जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े लोगों में हलचल रही।
एक संपत्ति का मूल्यांकन सही, दूसरी में कमी
निरीक्षण के दौरान सोनूघाट के निकट देवरिया-सलेमपुर मार्ग पर स्थित मौजा टड़वा की एक संपत्ति के विक्रय संबंधी अभिलेखों की जांच की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका स्टांप मूल्यांकन निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप पाया गया। वहीं, दूसरी संपत्ति के स्थलीय सत्यापन में मूल्यांकन की कमी सामने आई।
हालांकि, मूल्यांकन में कितनी कमी पाई गई और स्टांप शुल्क के रूप में कितनी राशि का अंतर है, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
सरकारी राजस्व की सुरक्षा पर जोर
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मूल्यांकन में कमी पाए जाने वाले मामले में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने संपत्तियों के क्रय-विक्रय और पंजीकरण के दौरान स्टांप शुल्क संबंधी नियमों का पालन कराने पर जोर दिया, ताकि सरकारी राजस्व को नुकसान न पहुंचे।
प्रशासन का उद्देश्य संपत्ति पंजीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और निर्धारित राजस्व की वसूली सुनिश्चित करना है। निरीक्षण के बाद अब संबंधित मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
