गोरखपुर
खुले नाले बन रहे मौत का जाल, दो साल में सात लोगों की गई जान
हादसों के बाद भी नहीं चेता प्रशासन, कई स्थानों पर अब तक नहीं लगाए गए स्लैब; राहगीरों की सुरक्षा पर सवाल
गोरखपुर। शहर में खुले नाले लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। पिछले दो वर्षों में खुले नालों में गिरकर सात लोगों की मौत होने के बावजूद कई स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हो सके हैं। जिन इलाकों में दर्दनाक हादसे हुए, वहां भी नालों को ढकने के लिए स्लैब नहीं लगाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। रात के अंधेरे में खुले नाले राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। लगातार हो रही घटनाओं ने नगर की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो साल में सात दर्दनाक हादसे
शहर में अलग-अलग स्थानों पर खुले नालों में गिरने से सात लोगों की जान जा चुकी है। इनमें मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्ग और कामकाजी लोग तक शामिल हैं।
11 अगस्त 2025: तिवारीपुर क्षेत्र के घोसीपुरवा में आठ वर्षीय आफरीन की निर्माणाधीन खुले नाले में गिरने से मौत हो गई थी।
19 फरवरी 2026: चिलुआताल थाना क्षेत्र की राप्तीनगर विस्तार कॉलोनी में 12 वर्षीय कन्हैया चौरसिया की खुले निर्माणाधीन नाले में गिरने से जान चली गई थी।
12 मई 2026: पादरी बाजार चौराहे पर देवरिया जिले के रामपुर कारखाना क्षेत्र के गौरा गांव निवासी 68 वर्षीय हंसराज यादव की नाले में गिरने से मौत हो गई थी।
9 जून 2026: शाहपुर थाना क्षेत्र के फातिमा रोड पर बासमंडी के सामने बिहार के समस्तीपुर निवासी तेंतर दास की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई थी।
19 सितंबर 2026: गोरखनाथ के बीआर केमिकल चौराहे पर 18 महीने की बच्ची मीना की नाले में गिरने से मौत हो गई थी।
21 सितंबर 2026: मदरसा चौराहे के पास खुले नाले में गिरने से करीब 40 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति की मौत हो गई थी।
11 अक्टूबर 2026: छात्रसंघ चौराहे के पास खुले नाले में गिरने से 31 वर्षीय सुरक्षा गार्ड सनिवेश कुमार की जान चली गई थी।

स्लैब लगाने और सुरक्षा इंतजाम की मांग
लगातार हो रहे हादसों के बावजूद शहर के कई इलाकों में खुले नाले लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। विशेषकर रात के समय पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में राहगीरों के नाले में गिरने का जोखिम बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि खुले नालों को प्राथमिकता के आधार पर ढका जाए और निर्माणाधीन नालों के आसपास बैरिकेडिंग तथा चेतावनी संकेत लगाए जाएं।
कब जागेगा जिम्मेदार विभाग?
सात लोगों की मौत का मामला नगर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। जरूरत है कि संबंधित विभाग शहर के सभी खुले नालों का सर्वे कराकर जोखिम वाले स्थानों को चिह्नित करें और वहां तत्काल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें। समय रहते नालों पर स्लैब लगाने, पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने और नियमित निरीक्षण से भविष्य में होने वाले हादसों को रोका जा सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग इन दर्दनाक घटनाओं से सबक लेकर ठोस कदम उठाएंगे, या खुले नाले इसी तरह लोगों की जान के लिए खतरा बने रहेंगे?
