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धर्म-कर्म

काशी में हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है गाजी मियां की दरगाह

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धार्मिक एवं सांस्कृतिक नागरिक काशी में हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक गाजी मियां का दरगाह है जो बड़ी बाजार में स्थित है।

हजरत सैयद सालार मसूद गाजी मियां 1014-1034 अर्ध पौराणिक गजनवी सेवा के मुखिया थे। जिन्हें सुल्तान मसूद का भांजा कहा जाता है। माना जाता है कि वह 11वीं शताब्दी की शुरुआत में भारत के विजय में अपने मामा के साथ आए थे। धर्म की नगरी काशी में हजरत सैयद सालार मसूद गाजी मियां रहमतुल्लाह अल्लाह का मजार बड़ी बाजार मे दरगाह है। यहां प्रतिवर्ष गाजी मियां के विवाह के अवसर पर लाखों लोगों की भीड़ होती हैं।इसमें मुस्लिम समुदाय के साथ हिंदू भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

गाजी मियां के शादी के तैयारियों में सवा महीने का लगन रखने की रवायत के बाद पलंग पीढ़ी (बारात की रस्म का जुलूस) बहराइच स्थित दरगाह पर भेजा जाता है।इसमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की भागीदारी होती है। जुलूस मार्केट कई सादुल्लाह पूरा चौकाघाट, हुकूलगंज, तिराहा, मकबूल आलम रोड पुलिस लाइन भोजूबीर होते हुए शिवपुर से बहराइच के लिए वहां से रवाना होता हैं।

गाजी मियां की शादी के मौके पर मन्नत मांगने के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ होती है। इसमें शादी, औलाद, और लंबी बीमारी से मुक्ति आदि मुरादों की आस में लोग शामिल होते हैं।

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