वाराणसी
लमही में प्रेमचंद के कहानी पर विशेष कार्यक्रम का हुआ आयोजन
‘मिस पद्मा’ के माध्यम से प्रेमचंद ने समाज में स्त्रियों की स्थिति को किया उजागर
वाराणसी (जयदेश)। हिंदी साहित्यिक परंपरा में स्त्री पात्रों को एक ठोस सामाजिक-आर्थिक आधार पर प्रस्तुत करने का कार्य उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने किया। जहां पहले स्त्रियां कथा में सिर्फ एक पात्र के रूप में दिखती थीं, वहीं प्रेमचंद ने उन्हें समाज में अपनी पहचान और अभिव्यक्ति का अवसर दिया। उनकी लेखनी ने साहित्य में नई सोच को जन्म दिया, जिससे न सिर्फ कथा को नया आयाम मिला, बल्कि समाज में स्त्रियों की स्थिति को भी मजबूती से चित्रित किया गया।
प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट लमही वाराणसी द्वारा प्रेमचंद स्मारक स्थल लमही में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रेमचंद की कहानी “मिस पद्मा” का पाठ वरिष्ठ रंगकर्मी, निर्देशक और लेखक अविनाश पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर प्रो. श्रद्धानंद, प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव, राजीव गोंड, डा. संजय श्रीवास्तव सहित अन्य प्रतिष्ठित लोगों ने उपस्थित होकर सम्मान दिया। कार्यक्रम में चंदन पटेल, रामजी सिंह, रोहित गुप्ता, संजय श्रीवास्तव, सुरेश दूबे, राहुल विश्वकर्मा, राहुल यादव, अंकित सिंह और अन्य ने कहानी का आनंद लिया। कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे ने किया, जबकि स्वागत समारोह का कार्य मनोज विश्वकर्मा ने किया।
