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वाराणसी

यूरोप का विकास हथियारों और भारत का विकास विचारों से हुआ- मंडलायुक्त

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जिले के 100 से अधिक विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ परिचय बैठक संपन्न

वाराणसी (जयदेश)। वाराणसी के कमिश्नरी ऑडिटोरियम हॉल में मंगलवार को शिक्षा बोर्ड के तत्वावधान में जनपद के 100 से अधिक विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ परिचय बैठक आयोजित की गयी थी। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाराणसी के मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा थे। विशिष्ट अतिथियों में पूर्व एमएलसी चेत नारायण सिंह और प्रोफेसर बृजभूषण ओझा शामिल थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यवाहक चेयरमैन नागेन्द्र प्रताप सिंह ने की जबकि संचालन का डॉ. नन्दलाल सिंह ने किया। मंडलायुक्त ने कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा बोर्ड की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।

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उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को ब्रिटिश शासन और स्वतंत्रता के बाद की सरकारों द्वारा उपेक्षित किया गया जिससे देश की शिक्षा व्यवस्था में विभाजनकारी प्रभाव पैदा हुआ। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिवर्तन हथियारों से नहीं विचारों से आता है और भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य भारतीयता का बोध कराना और भारतीय मूल्यों को स्थापित करना है।

कार्यक्रम में यह बताया गया कि 100 संतों के प्रयास से स्वामी रामदेव के नेतृत्व में भारतीय शिक्षा बोर्ड को भारत सरकार द्वारा जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंडलायुक्त ने यह भी कहा कि यूरोप का विकास हथियारों से हुआ है‌ जबकि भारत का विकास विचारों से। उन्होंने यह भी कहा कि जहां यूरोप के लिए दुनिया एक बाजार है वहीं भारत के लिए दुनिया एक परिवार है।

उन्होंने डॉ. अम्बेडकर का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने देश छोड़ने के बजाय भारतीय सनातन परंपरा में ही अपनी जगह बनाई। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन चेत नारायण सिंह द्वारा किया गया और अतिथियों का स्वागत संत अतुलानंद रचना परिषद के सचिव राहुल सिंह ने किया।

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