वाराणसी
होटल, मॉल और सोसाइटियों में फायर सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति अनिवार्य
30 दिसंबर तक तैनाती नहीं होने पर जारी होगा नोटिस
वाराणसी। शहर के होटल, मॉल, अस्पताल और आवासीय सोसाइटियों में अब फायर सेफ्टी ऑफिसर और कर्मियों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। यूपी सरकार द्वारा आग की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए नई नियमावली लागू की गई है। इसके तहत सभी प्रमुख भवनों में फायर सेफ्टी ऑफिसर और कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) आनंद कुमार ने बताया कि आग की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई के लिए यह कदम उठाया गया है। वाराणसी जैसे घनी आबादी वाले शहर में अग्निशमन वाहनों के पहुंचने में समय लगता है। ऐसे में भवनों में फायर सेफ्टी टीम की मौजूदगी आग पर जल्दी काबू पाने में मददगार होगी।
कौन से भवन आएंगे नियमावली के दायरे में?
24 मीटर से अधिक ऊंचे गैर-आवासीय भवन।
45 मीटर से अधिक ऊंचे आवासीय भवन।
15 मीटर से अधिक ऊंचे अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और अन्य संस्थागत भवन।
4 सितारा और उससे अधिक के होटल।
लो-हैजार्ड इंडस्ट्री (10,000 वर्ग मीटर से अधिक का भू-आच्छादन)।
हाई-हेजार्ड इंडस्ट्री (5,000 वर्ग मीटर से अधिक का भू-आच्छादन)।
25 मीटर से ऊंचे शैक्षणिक भवन और एसेंबली हॉल।
500 से अधिक क्षमता वाले सिनेमा हॉल।
2,000 वर्ग मीटर से बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स।
फायर सेफ्टी ऑफिसर भवन में स्थापित अग्निशमन उपकरणों का रखरखाव करेंगे। आग लगने की स्थिति में यह टीम प्राइमरी स्तर पर कार्यवाही करेगी और विभाग को सूचना देगी। प्रत्येक भवन में शिफ्ट के आधार पर कर्मी तैनात किए जाएंगे।
सीएफओ ने कहा कि फायर सेफ्टी ऑफिसर की योग्यता और प्रशिक्षण के मानक तय किए गए हैं। संबंधित भवन स्वामी द्वारा इनकी नियुक्ति 30 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से कर ली जानी चाहिए। 1 जनवरी 2025 से विभाग द्वारा जांच शुरू की जाएगी, और नियम न मानने वाले भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया जाएगा। यह पहल वाराणसी जैसे गलियों वाले शहर में त्वरित अग्निशमन सेवा प्रदान करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फायर सेफ्टी ऑफिसर की तैनाती से जान-माल की क्षति को कम किया जा सकेगा और भवनों के अग्निशमन उपकरण हमेशा कार्यशील रहेंगे।
