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वाराणसी

देश और धर्म के नाम हो हर कार्य – योगी

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मुख्यमंत्री ने किया स्वर्वेद महामंदिर में दर्शन, वैदिक गुरुकुलम् के नौव विस्तार का उद्घाटन

विहंगम योग संत समाज के शताब्दी समारोह के अवसर पर वाराणसी के उमरहा स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम में आयोजित 25,000 कुण्डीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाग लिया।

शनिवार को पूर्वाहन 09:50 बजे मुख्यमंत्री का आगमन हुआ जहां उन्होंने सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज और संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज की उपस्थिति मंदिर में दर्शन किया।

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योगी आदित्यनाथ ने सद्गुरु सदाफल देव आप्त वैदिक गुरुकुलम् के नव विस्तार का उद्घाटन किया और गुरुकुल के लगभग 300 छात्रों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर और अनाथ बच्चों को वस्त्र और पारितोषिक प्रदान किए।

इसके बाद उन्होंने महायज्ञ में भाग लिया जहां उन्हें अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के प्रति समर्पण पर बल देते हुए कहा कि हर कार्य देश और धर्म के नाम होना चाहिए।

उन्होंने विहंगम योग के संस्थापक सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने 1924 में विहंगम योग संत समाज की स्थापना कर भारतीय योग और आध्यात्मिक परंपरा को जन-जन तक पहुंचाया।

संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने यज्ञ को भारतीय संस्कृति का प्राण बताया और कहा कि यह शुभ कर्म और पर्यावरण शुद्धि का माध्यम है।

उन्होंने यज्ञ के धुएं को आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से युक्त बताया जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है।महायज्ञ में लाखों श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच आहुतियां दीं जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण शुद्ध हो गया।

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यज्ञ के उपरांत हजारों नए जिज्ञासुओं ने ब्रह्मविद्या विहंगम योग की दीक्षा ली। कार्यक्रम के सायंकालीन सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजनों की प्रस्तुति हुई।संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि योग को केवल आसन और प्राणायाम तक सीमित करना उचित नहीं है।

इसका मूल स्वरूप आत्मज्ञान और परमात्म ज्ञान की आंतरिक साधना है जिसे विश्व भर में पुनः स्थापित करना आवश्यक है। उन्होंने विहंगम योग के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह संसार में रहते हुए भी निर्लिप्त रहने का मार्ग दिखाता है।

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