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पूर्वांचल

पूर्वांचल से हज यात्रियों की संख्या में गिरावट, 2019 से काशी से काबा की उड़ानें बंद

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पूर्वांचल से हज पर जाने वाले जायरीनों की संख्या में साल-दर-साल गिरावट दर्ज की जा रही है। एक समय था जब इस क्षेत्र से 4,000 से 5,000 तक जायरीन हज यात्रा के लिए जाते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर आधी रह गई है। इस साल कुल 2,167 जायरीन हज के लिए जा रहे हैं, जिनमें वाराणसी से 698 और सबसे कम सोनभद्र से 21 जायरीन शामिल हैं। हज के लिए जितने भी आवेदन आए सभी का चयन किया गया है, और लॉटरी की प्रक्रिया मात्र औपचारिकता बनकर रह गई है।

वाराणसी से उड़ानें बंद, बढ़ा खर्च

2019 से वाराणसी से हज के लिए उड़ानें बंद हो गई हैं जिससे पूर्वांचल के जायरीन अब लखनऊ से यात्रा करते हैं। इससे यात्रा का खर्च खासकर किराया काफी बढ़ गया है। हज सब्सिडी खत्म होने के बाद हज यात्रा के आवेदन भी कम होने लगे हैं। उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति के को-ऑर्डिनेटर अरमान अहमद और मास्टर हज ट्रेनर अदनान खान ने बताया कि वाराणसी से उड़ानें बंद होने और खर्च बढ़ने के कारण जायरीन की संख्या में गिरावट आई है।

हज उड़ानें बहाल करने की मांग

वाराणसी से काबा के लिए उड़ानें 2019 में बंद कर दी गईं, और तब से इन्हें फिर से शुरू करने की कई बार मांग की गई है। 2023 में उड़ानें फिर से शुरू करने की योजना थी, लेकिन अंतिम समय में इसे रद्द कर दिया गया।

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स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन

हज यात्रा से पहले 466 जायरीन की स्वास्थ्य जांच की गई। यह जांच तीन दिनों तक चले हज कैंप के दौरान की गई, जिसका समापन बुधवार को हुआ। जायरीन के ब्लड प्रेशर, शुगर, और छाती का एक्स-रे किया गया। जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं, उन्हें दवाओं और खानपान पर ध्यान रखने की सलाह दी गई।

इस साल पूर्वांचल के प्रमुख जिलों से हज यात्रा के लिए जाने वाले जायरीन की संख्या इस प्रकार रही:

वाराणसी: 698, प्रयागराज: 344, मऊ: 222, आजमगढ़: 218, गोरखपुर: 133, गाजीपुर: 97, भदोही: 65, सोनभद्र: 21

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