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पूर्वांचल

जौनपुर : प्रधानमंत्री के लोकार्पण करने के बाद भी नहीं शुरू हो सकी आईपीडी, मुख्यमंत्री के निर्देश की हो रही अवहेलना!

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गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अन्य शहरों या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन ज़मीनी सच्चाई इसके विपरीत है। 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित उमानाथ सिंह स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) की ओपीडी में अभी भी तीन साल बाद इंडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी 2022 में अस्पताल का दौरा करके जल्द से जल्द आईपीडी सेवाओं को शुरू करने के निर्देश दिए थे।

2022 में मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों को छह महीनों के भीतर आईपीडी सेवा चालू करने का सख्त निर्देश दिया गया था। तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक कुमार ने 150 बेड के अस्पताल को तय समय सीमा के भीतर पूरी तरह चालू करने की बात कही थी। इसके बावजूद, तीन साल बीत जाने के बाद भी आईपीडी का काम अधूरा है।

अस्पताल की नई इमारत में कई निर्माण कार्य अभी तक पूरे नहीं हुए हैं, जिससे बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली और पानी की आपूर्ति, फर्नीचर की व्यवस्था और चिकित्सा उपकरणों की स्थापना जैसे आवश्यक कार्य अभी भी अधूरे पड़े हैं। ठेकेदारों की लापरवाही और निर्माण सामग्री की कमी के कारण कार्य में प्रगति नहीं हो रही है, जिससे अस्पताल के संचालन में बाधाएं आ रही हैं।

आईपीडी सेवाओं के न होने से गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अन्य शहरों या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे न केवल उन्हें अतिरिक्त मुश्किलों का सामना करना पड़ता है बल्कि इलाज में देरी भी होती है। ओपीडी पर निर्भरता के कारण, मरीजों को सही और समुचित इलाज मिलने में कठिनाई होती है, जबकि भर्ती मरीजों को बेड की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

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