गाजीपुर
मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा की स्रोत हैं मां चंद्रघंटा
नवरात्रि के तीसरे दिन मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा, विधि-विधान से हुई मां की पूजा-अर्चना
बहरियाबाद (गाजीपुर)। जयदेश। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर बहरियाबाद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भक्ति का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा शांति, शक्ति, साहस और वीरता की प्रतीक हैं। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। सिंहवाहिनी मां की दस भुजाएं हैं, जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं। उनका यह स्वरूप अन्याय और दुष्ट शक्तियों का विनाश करने वाला माना जाता है, जबकि भक्तों के प्रति उनका रूप अत्यंत सौम्य और कल्याणकारी है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब असुरों का अत्याचार बढ़ा, तब मां चंद्रघंटा ने दुष्ट शक्तियों का संहार कर देवताओं की रक्षा की। उनकी आराधना से भक्तों को भय से मुक्ति, साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति प्राप्त होने की मान्यता है।
आध्यात्मिक साधना में विशेष महत्व
योग और साधना की दृष्टि से भी मां चंद्रघंटा की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि उनकी आराधना से साधक को मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। नवरात्रि में श्रद्धालु मां को दूध, खीर और शहद सहित विभिन्न प्रसाद अर्पित करते हैं।
नवरात्रि के दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालु मां चंद्रघंटा से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना कर रहे हैं।
