गाजीपुर
सात दशक से सिधौना में कायम है रामलीला की परंपरा, 11 अक्टूबर से होगा मंचन
टेंट सजकर तैयार, अंतिम दौर में कलाकारों का पूर्वाभ्यास; 20 अक्टूबर को होगा राम-रावण युद्ध, 22 को राम राज्याभिषेक के साथ समापन
सिधौना (गाजीपुर)। क्षेत्र की ऐतिहासिक रामलीला के आयोजन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्री आदर्श रामलीला समिति ट्रस्ट के तत्वावधान में होने वाले मंचन के लिए परिसर में टेंट सजकर तैयार हैं। मंच को अंतिम रूप दिया जा चुका है, जबकि कलाकार पूर्वाभ्यास के अंतिम दौर में जुटे हैं। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली रामलीला का समापन 22 अक्टूबर को होगा।

सात दशक से निभाई जा रही परंपरा
सिधौना की रामलीला करीब सात दशक से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। पारंपरिक प्रस्तुति और स्थानीय कलाकारों के जीवंत अभिनय के कारण इसे देखने गाजीपुर के साथ वाराणसी, जौनपुर, चंदौली और आजमगढ़ से भी दर्शक पहुंचते हैं। राम, लक्ष्मण, सीता और रावण सहित विभिन्न पात्रों की भूमिका स्थानीय ग्रामीण निभाते हैं। कलाकार अपने दैनिक कामकाज से समय निकालकर श्रद्धा और उत्साह के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
मुकुट पूजा के साथ होगा शुभारंभ
समिति के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 11 अक्टूबर को बाबा सिद्धनाथ महादेव मंदिर में श्रृंगार और मुकुट पूजा के साथ रामलीला का शुभारंभ होगा। पहले दिन नारद मोह और रावण जन्म के प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। इसके बाद श्रीराम जन्म, ताड़का वध, सीता फुलवारी, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और श्रीराम-सीता विवाह जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।
वनवास से लंका दहन तक होंगे मंचन
आयोजन के दौरान राम वनवास, भरत मनावन, नक्कटैया, सीता हरण, शबरी मिलन, बाली वध, लंका दहन और अंगद-रावण संवाद सहित रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन होगा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और मर्यादा से जुड़ी कथाओं को देखने का अवसर मिलेगा।
विजयादशमी पर होगा राम-रावण युद्ध
कार्यक्रम के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर राम-रावण युद्ध का भव्य मंचन किया जाएगा। 21 अक्टूबर को राम दरबार की झांकी निकाली जाएगी, जबकि 22 अक्टूबर को राम राज्याभिषेक के साथ आयोजन का समापन होगा।
आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह
रामलीला को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। समिति की ओर से श्रद्धालुओं और रामलीला प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर मंचन देखने और स्थानीय कलाकारों का उत्साहवर्धन करने की अपील की गई है।
