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गोरखपुर

गृह विज्ञान विभाग में 10 दिवसीय हस्तशिल्प कार्यशाला का समापन, प्रदर्शनी में दिखी रचनात्मकता की झलक

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गोरखपुर। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में आयोजित 10 दिवसीय कौशल विकास कार्यशाला का समापन भव्य प्रदर्शनी और प्रमाणपत्र वितरण समारोह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार विभिन्न हस्तनिर्मित उत्पादों—टाई एंड डाई, बाटिक, ब्लॉक प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, डिजिटल एम्ब्रॉयडरी, मैक्रमे और स्टेंसिल आर्ट—का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, गुणवत्ता और नवाचार स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।

कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना, उनके कौशल को व्यवहारिक मंच देना तथा उनमें उद्यमिता की भावना विकसित करना रहा। प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने उत्पादों के विपणन का अनुभव प्राप्त हुआ, जिससे उनमें स्वरोजगार के प्रति रुचि और आत्मविश्वास बढ़ा।

समारोह में विश्वविद्यालय की कुलपति पुनम टंडन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में हुनर सबसे बड़ी पूंजी है और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करते हैं तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए सशक्त बनाते हैं। उन्होंने गृह विज्ञान विभाग की पहल की सराहना करते हुए इसे विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यशाला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली एम.ए. चतुर्थ सेमेस्टर की छात्रा अनुप्रिया यादव को प्रोत्साहन स्वरूप डिजिटल सिलाई मशीन अल्लूरा प्रदान की गई, ताकि वह अपने कौशल को और बेहतर ढंग से विकसित कर सकें।

विभागाध्यक्ष दिव्या रानी सिंघ ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न हस्तशिल्प और तकनीकी कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे अपने कौशल को निखारकर भविष्य में आजीविका के रूप में अपनाने में सक्षम होंगे। कार्यक्रम संयोजक डॉ. नीता सिंह ने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें नए अवसरों के लिए तैयार करते हैं।

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उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस कार्यशाला और प्रदर्शनी के माध्यम से पाठ्यक्रम में शामिल “Industrial Training/Research Project” को व्यावहारिक रूप में सार्थकता मिली। विद्यार्थियों ने कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहार में उतारते हुए उत्पाद निर्माण, डिजाइन, नवाचार और विपणन की पूरी प्रक्रिया को समझा। इससे उनका अकादमिक प्रोजेक्ट जीवंत हुआ और उन्हें उद्योग तथा स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर मिला।

यह कार्यशाला Usha International Limited के सहयोग से आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को आधुनिक और पारंपरिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में चित्रा श्रीवास्तव, दीप शर्मा के साथ ITI गौरी बाजार की क्षमा रानी, राजेश यादव, जयदीप मौर्य और मयंक श्रीवास्तव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हुए विभिन्न तकनीकों में दक्ष बनाया।

समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की और उन्हें अपने कौशल को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रदर्शनी में उत्पादों की बिक्री भी हुई, जिससे विद्यार्थियों में उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की भावना को बल मिला। यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए सीखने, सृजनात्मकता प्रदर्शित करने और आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ।

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