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ट्रैक्टर मार्च और महापंचायत को लेकर भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने सौंपा मांग पत्र
संतकबीरनगर। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने किसानों, मजदूरों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के नाम मांग पत्र सौंपते हुए विभिन्न मांगों को उठाया है। संगठन के जिलाध्यक्ष उमेश भट्ट ने महामहिम राष्ट्रपति, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा जिलाधिकारी संतकबीरनगर को संबोधित मांग पत्र भेजकर किसानों के हित में कार्रवाई की मांग की है।
जिलाध्यक्ष उमेश भट्ट ने बताया कि संगठन लंबे समय से किसानों और मजदूरों के ज्वलंत मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहा है। उन्होंने भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील को किसानों के लिए नुकसानदेह बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि भारत में अधिकतर किसान छोटे और सीमांत हैं, जबकि अमेरिका में बड़े स्तर पर खेती होती है और वहां किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है। ऐसे में भारतीय किसान प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।
संगठन ने सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी का कानून बनाने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि वर्तमान में किसानों की अधिकांश फसलों की खरीद एमएसपी पर नहीं हो पाती, जिससे किसानों को हर वर्ष भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) ने किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी, बीज बिल और बिजली बिल को वापस लेने की मांग भी सरकार से की है। संगठन का आरोप है कि इन विधेयकों से बड़ी कंपनियों का एकाधिकार बढ़ेगा और किसानों को महंगे बीजों पर निर्भर होना पड़ेगा।
इसके साथ ही किसानों, मजदूरों और आम जनता के लिए मुफ्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
उमेश भट्ट ने बताया कि इन मांगों को लेकर संगठन ने आंदोलन की रूपरेखा भी घोषित की है। 27 फरवरी 2026 को भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील के विरोध में अमेरिकी राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया गया था। वहीं 10 मार्च 2026 को देश के सभी जिलों की तहसीलों पर ट्रैक्टर मार्च निकालकर किसान सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
इसके अलावा 23 मार्च 2026 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पीपली में एक विशाल किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से किसान, मजदूर और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग शामिल होंगे। इस महापंचायत में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
