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गोरखपुर

AIIMS गोरखपुर में सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह का हुआ आयोजन

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गोरखपुर में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, शीघ्र पहचान एवं टीकाकरण के प्रति सामान्य जनमानस को जागरूक करने के उद्देश्य से AIIMS गोरखपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा आज सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के अंतर्गत एक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित सरल एवं व्यवहारिक संदेशों पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर जूनियर रेजिडेंट डॉ. सौम्या एवं डॉ. जागृति ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। डॉ. सौम्या ने सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह एक सरल जांच है, जिसे पैप टेस्ट कहा जाता है और इसमें केवल कुछ ही मिनट लगते हैं। वहीं डॉ. जागृति ने एचपीवी टीकाकरण के महत्व, इसकी सुरक्षा एवं सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में इसकी प्रभावी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

नर्सिंग ऑफिसर अंकिता ने जीवनशैली एवं निवारक उपायों पर प्रकाश डालते हुए जननांग स्वच्छता बनाए रखने, योनि संक्रमणों का समय पर उपचार कराने तथा असामान्य योनि रक्तस्राव या रजोनिवृत्ति के बाद होने वाले रक्तस्राव को कभी भी नजरअंदाज न करने की सलाह दी।

कार्यक्रम को अधिक रोचक एवं प्रभावी बनाने के लिए नर्सिंग छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें शीघ्र स्वास्थ्य सेवा लेने, नियमित स्क्रीनिंग एवं टीकाकरण के महत्व को सरल और प्रभावशाली तरीके से दर्शाया गया। इस अवसर पर नर्सिंग ट्यूटर सुश्री देविगा ने भी किशोरियों के समय पर टीकाकरण के महत्व पर बल दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. शिखा सेठ ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है, जबकि यह बड़े स्तर पर रोकथाम योग्य है। उन्होंने कहा कि 25 से 65 वर्ष की सभी महिलाओं को प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार सर्वाइकल कैंसर की जांच अवश्य करानी चाहिए, जिससे रोग की समय रहते पहचान कर जीवन की रक्षा की जा सकती है।

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डॉ. अराधना सिंह, संकाय सदस्य, ने कहा कि ज्ञान, जागरूकता और समय पर जांच के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर से बचाव संभव है तथा महिलाओं को किसी भी लक्षण को नजरअंदाज किए बिना शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। डॉ. प्रियंका सिंह ने कार्यक्रम में पुरुषों की उत्साहजनक भागीदारी को सराहते हुए कहा कि बेटियों को सुरक्षित रखने के लिए 9 से 21 वर्ष की आयु में एचपीवी टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है।

इस अवसर पर डॉ. प्रीति प्रियदर्शनी एवं डॉ. विभा रानी पिपल सहित अन्य संकाय सदस्यों ने भी अपने विचार साझा करते हुए स्क्रीनिंग एवं टीकाकरण के महत्व को दोहराया।

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और जागरूकता से संबंधित प्रश्नों के उत्तर दिए, जिससे कार्यक्रम की सफलता स्पष्ट हुई।

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने निरंतर जन-जागरूकता एवं निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर के बोझ को कम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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