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वाराणसी

कफ सिरप तस्करी मामले में पुलिस ने दाखिल की 4,124 पन्नों की चार्जशीट, मुख्य आरोपी शुभम समेत 13 नामजद

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वाराणसी / सोनभद्र | कफ सिरप तस्करी मामले में पुलिस ने दाखिल की 4,124 पन्नों की चार्जशीट, मुख्य आरोपी शुभम समेत 13 नामजद कफ सिरप की बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी के विरुद्ध चल रही कानूनी कार्रवाई में सोनभद्र पुलिस ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार करते हुए मुख्य सरगना शुभम जायसवाल सहित कुल 13 अभियुक्तों के विरुद्ध अदालत में पहली चार्जशीट पेश कर दी है।

विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट की अदालत में दाखिल यह आरोप पत्र 4,124 पन्नों का है, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए सुनवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के अनुसार, इस मामले में नामजद सभी आरोपियों को न्यायिक समन जारी किए गए हैं और उन्हें आगामी 6 मई को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।

यह पूरा प्रकरण 18 अक्तूबर 2025 का है, जब रॉबर्ट्सगंज कोतवाली के इको पॉइंट के निकट चेकिंग के दौरान पुलिस ने दो कंटेनरों से करीब 1,19,675 शीशी कफ सिरप बरामद किया था। इस अवैध कारोबार में संलिप्त अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने उस समय मौके से बृजमोहन शिवहरे, रामगोपाल धाकड़ और हेमंत पाल को गिरफ्तार किया था।

जांच के दौरान तस्करी के इस जाल में वान्या इंटरप्राइजेज नई दिल्ली की भूमिका भी स्पष्ट हुई, जिसके माध्यम से कफ सिरप की खेप को ठिकाने लगाया जाता था। इसी कड़ी में पुलिस ने सहारनपुर निवासी विशाल उपाध्याय और अभिषेक शर्मा, गाजियाबाद के सौरभ त्यागी और सादाब, मधुबन बापूधाम के संतोष भडाना, कानपुर के शिवकांत उर्फ शिव, जौनपुर के स्वप्निल केशरी, वाराणसी के दिनेश कुमार यादव तथा मध्य प्रदेश के सुशील यादव उर्फ हल्कू के विरुद्ध साक्ष्य एकत्रित कर उन्हें आरोप पत्र में शामिल किया है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का मुख्य सूत्रधार शुभम जायसवाल वर्तमान में देश छोड़कर दुबई फरार हो चुका है। उसकी अनुपस्थिति में पुलिस ने संपत्ति कुर्की की कार्रवाई को आधार बनाकर चार्जशीट दाखिल की है, जबकि उसे वापस लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। शुभम के पिता भोला प्रसाद को पहले ही पिट-एनडीपीएस एक्ट के तहत निरुद्ध किया जा चुका है।

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वहीं, एक अन्य कंटेनर के लिए सिरप की व्यवस्था करने वाले विनोद और संस्कार वर्मा के विरुद्ध फिलहाल विवेचना जारी है। पुलिस अधिकारी अब उन फर्मों और सफेदपोश मददगारों की पहचान करने में जुटे हैं, जिन्होंने इस अवैध व्यापार में गोपनीय रूप से सहायता प्रदान की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए निरंतर दबिश दे रही हैं।

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