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IAS पद्मा जायसवाल बर्खास्त, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कार्रवाई

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पद्मा जायसवाल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। 2003 बैच की AGMUT कैडर की आईएएस अधिकारी पद्मा जायसवाल के खिलाफ यह फैसला कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सिफारिश पर भारत की राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद लिया गया। DoPT सीधे प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है और AGMUT कैडर से जुड़े मामलों में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की सिफारिशों के आधार पर निर्णय करता है।

क्या है पूरा मामला?
यह कार्रवाई करीब 18 वर्ष पुराने मामले से जुड़ी हुई है। मामला वर्ष 2007-08 का है, जब पद्मा जायसवाल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में उपायुक्त के पद पर कार्यरत थीं। फरवरी 2008 में स्थानीय निवासियों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में उन पर अपने आधिकारिक पद के दुरुपयोग और सरकारी धन के गबन के गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपों के बाद अप्रैल 2008 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था, हालांकि अक्टूबर 2010 में उनका निलंबन बहाल कर दिया गया था।

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पद्मा जायसवाल ने अपने दो दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने सेंट जेवियर्स स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी बिजनेस School से पढ़ाई की। उनके पास MBA की डिग्री है और वह इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) से प्रमाणित कंपनी सेक्रेटरी (CS) भी हैं।

उन्होंने यूजीसी रिसर्च फेलो के रूप में भी कार्य किया है। उनके शैक्षणिक फोकस क्षेत्रों में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, मैनेजमेंट, इंटरनेशनल अफेयर्स, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और लीगल पर्सनल मैनेजमेंट शामिल रहे हैं।

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