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वाराणसी

नवजातों में बढ़ रही हाइपोथायरायडिज़्म की समस्या

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हाइपोथायरायडिज्म के कारण और लक्षण

वाराणसी। थायरॉइड की समस्या, जो अब तक केवल बड़े-बुजुर्गों तक सीमित मानी जाती थी, अब नवजात शिशुओं में भी देखने को मिल रही है। मंडलीय अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में हर महीने लगभग 15 नवजात शिशुओं में हाइपोथायरायडिज्म के मामले सामने आ रहे हैं।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सीपी गुप्ता ने बताया कि नवजात शिशुओं में आयोडीन की कमी, ऑटोइम्यून विकार, मस्तिष्क दोष और थायरॉइड ग्रंथि की विकृतियां इस समस्या के मुख्य कारण हैं। कई बार यह समस्या तब भी हो जाती है जब गर्भावस्था के दौरान मां से बच्चे को पर्याप्त थायरॉइड हार्मोन नहीं मिल पाता।

हाइपोथायरायडिज्म के कारण और लक्षण

थायरॉइड ग्रंथि का पर्याप्त मात्रा में हार्मोन न बनाना हाइपोथायरायडिज्म की वजह बनता है। इसके पीछे स्वप्रतिरक्षी विकार, आयोडीन की कमी और चोट जैसे कारण हो सकते हैं। नवजात शिशुओं में इसके लक्षणों में पीलिया, सांस लेने में दिक्कत, दिल की धड़कन का धीमा या तेज होना, कब्ज और हमेशा मुंह का थोड़ा खुला रहना शामिल हैं।

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डॉ. गुप्ता ने बताया कि नवजात शिशु के जन्म के 48 घंटे बाद ही हाइपोथायरायडिज्म की स्क्रीनिंग कराई जानी चाहिए, ताकि इसे समय रहते पहचाना और इलाज किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या को नजरअंदाज करना बच्चे के विकास और स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।

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