वाराणसी
बनारसी साड़ियों पर संकट : बुनकरों की चिंता के बीच अधिकारियों का दावा – “कारोबार में आयी रौनक”
वाराणसी के बुनकरों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। बिजली की बढ़ती कीमतें और काम की कमी के कारण पावरलूम बंद हो रहे हैं। बुनकर सरदार अजीजुल्लाह अंसारी के अनुसार बुनकारी का काम अगले पांच साल में खत्म हो सकता है। पहले 60 रुपए में बिजली मिलती थी अब 450 से 850 रुपए तक का बिल देना पड़ता है।
जैतपुरा इलाके के बुनकर सऊद अंसारी ने बताया कि सूरत में काम करके 800 रुपए रोज कमा रहे हैं जबकि यहां 300 रुपए ही मिलते थे। घरों के बंटवारे और काम की कमी ने बुनकरों को मजबूर कर दिया है। मासूम अली का कहना है कि योजनाएं होने के बावजूद उनका लाभ बुनकरों तक नहीं पहुंच रहा। बनारसी साड़ी की पहचान को भी नुकसान हुआ है।
सूरत में बने यार्न और चाइनीज मशीनों से साड़ियां तैयार हो रही हैं। हैंडलूम के कारीगरों की उम्र 50 साल से ऊपर है और युवा अब इस पेशे में नहीं आना चाहते।
पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के अनुसार बनारसी साड़ी को 2009 में जीआई टैग मिलने के बाद हैंडलूम का काम बढ़ा है।
हालांकि पावरलूम को मिलने वाली सब्सिडी का दुरुपयोग हुआ है। वाराणसी के सहायक आयुक्त अरुण कुमार कुरील ने कहा कि बनारसी साड़ी का असली ब्रांड सिल्क की साड़ियां हैं जो सिर्फ हैंडलूम पर तैयार होती हैं।
