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वाराणसी

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए लोगों को किया जागरुक

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वाराणसी। बच्चों के इलाज में सही मार्गदर्शन और उचित देखभाल होना बहुत जरूरी है। व्यस्कों की तुलना में बच्चों के उपचार में यह दोनों ही बातें अहम भूमिका निभाती हैं। यह कहना है नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों का। वाराणसी और उसके आसपास के क्षेत्रों में बच्चों से जुड़ी बीमारियां, उनकी जांच और बेहतर इलाज के लिए लोगों में जागरुकता लाने के उददेश्य से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों ने बताया कि बच्चों को उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के लिए अपोलो की ओर से जारी एक पहल के तहत जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है।
वाराणसी के होटल क्लार्क्स में इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी एंड क्रिटिकल केयर के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नमित जेराथ ने कहा, “अपोलो हॉस्पिटल्स पूरे भारत में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की खाई को पाट रहा है। निदान से उपचार तक रोगी की चिकित्सा यात्रा में अपोलो अस्पताल अग्रणी है। हमारा उद्देश्य इलाज की तलाश में परेशानी मरीजों की सहायता करना है।

इस चर्चा के माध्यम से हमारा ध्यान बाल चिकित्सा पर है। लोगों को अपोलो अस्पताल में उपलब्ध इन प्रगति के बारे में शिक्षित करना है। हम रोगियों को समय पर निदान और शीघ्र उपचार का लाभ प्रदान करने का प्रयास करते हैं।”
वहीं पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विनीत भूषण गुप्ता ने कहा, “वर्षों से, हमारा प्रयास अधिक से अधिक लोगों को विशेषज्ञ सलाह और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलने का है।

बच्चों में मस्तिष्क तंत्र या फिर न्यूरोलॉजी से जुड़े विकार के मामले काफी बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों को सही जानकारी‌ मिले तो इनसे बचाव किया जा सकता है।’’ डॉ. विनीत भूषण ने उम्मीद जताते हुए कहा कि इस पहल से वाराणसी के मरीजों को अपने शहर के आराम से इलाज के बेहतरीन तरीके मिल सकेंगे।
एक सवाल पर इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के बाल रोग गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी व हेपेटोलॉजी की सलाहकार डॉ स्मिता मल्होत्रा ने कहा, “बच्चों में पेट से जुड़ी परेशानियां काफी तेजी से बढ़ रही हैं। छोटी छोटी उम्र में भी बच्चे लीवर से जुड़ी परेशानियों से ग्रस्त हो रहे हैं। इनमें सही देखभाल के साथ समय पर उपचार बहुत जरूरी है। अगर लोगों को यह पता होगा कि इस स्थिति में कैसे बचाव किया जा सकता है? तब मरीज को सुरक्षित रखने में भी कामयाबी मिलती है।’’
उन्होंने कहा कि वाराणसी के वात्सल्य चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में मासिक विशेषीकृत ओपीडी में प्राप्त विशेष मार्गदर्शन के कारण पुरानी गैस्ट्रो बीमारियों और लीवर की बीमारियों वाले कई बच्चे लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों में भी लीवर प्रत्यारोपण की स्थिति होती है और इसके बारे में जागरुकता होना सबसे जरूरी है।

इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के बारे में:
भारत का पहला जेसीआई मान्यता प्राप्त इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल दिल्ली सरकार और अपोलो अस्पताल एंटरप्राइज लिमिटेड के बीच एक संयुक्त उद्यम है। जुलाई 1996 में यह कमीशन किया गया था। यह अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप द्वारा स्थापित तीसरा सुपर-स्पेशियलिटी टर्शियरी केयर हॉस्पिटल है जो 15 एकड़ में फैला है। यहां 300 से अधिक विशेषज्ञ और 700 से अधिक ऑपरेशनल बेड, 19 ऑपरेशन थिएटर, 138 आईसीयू बेड, चौबीसों घंटे फार्मेसी, एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं, 24 घंटे आपातकालीन सेवाओं और एक सक्रिय एयर एम्बुलेंस के साथ 57 विशेषता हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स की ओर से देश में किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट में सबसे आगे है।

भारत में पहला सफल बाल रोग और वयस्क लीवर ट्रांसप्लांट इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में किया गया था। चिकित्सा प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता के मामले में अस्पताल सबसे आगे है। यह अपने रोगियों की देखभाल के लिए नवीनतम नैदानिक, चिकित्सा और शल्य चिकित्सा सुविधाओं की एक पूरी श्रृंखला प्रदान करता है।

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अस्पताल ने 64 स्लाइस सीटी और 3 टेस्ला एमआरआई, नोवालिस टीएक्स और एकीकृत पीईटी सूट की शुरुआत के साथ भारत में सबसे परिष्कृत इमेजिंग तकनीक पेश की है। इंद्रप्रस्थ अपोलो ने निवारक स्वास्थ्य जांच कार्यक्रमों की अवधारणा का भी बीड़ा उठाया है और दशकों से एक संतुष्ट ग्राहक आधार बनाया है। पिछले कुछ वर्षों से द वीक सर्वे द्वारा अस्पताल को लगातार भारत के सर्वश्रेष्ठ 10 अस्पतालों में स्थान दिया गया है।

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