मऊ
मधुबन नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर संकट, हाईकोर्ट ने दो माह में अंतिम निर्णय का दिया निर्देश
मधुबन (मऊ)। नगर पंचायत मधुबन की अध्यक्ष आरती मल्ल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। भ्रष्टाचार और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के आरोपों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शासन को मामले में दो माह के भीतर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश सभासद निलेश राजरत्नम और अखिलेश राज की ओर से दाखिल रिट याचिका संख्या 31311/2026 पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की।
याचिकाकर्ताओं ने अध्यक्ष पर आउटसोर्सिंग एजेंसियों और परिजनों के साथ मिलकर सरकारी धन के कथित गबन तथा वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए हैं। मामले की प्रारंभिक जांच तहसीलदार मधुबन ने की थी और चार जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद मामले की जांच मंडलायुक्त आजमगढ़ को सौंपी गई।
याचिका में तहसीलदार की जांच रिपोर्ट शासन को भेजने, उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम की धारा 48(2) के तहत अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने, जांच पूरी होने तक वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज करने तथा दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि मंडलायुक्त की विस्तृत जांच रिपोर्ट एक सितंबर 2026 को शासन को प्राप्त हो चुकी है। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो माह के भीतर जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन अंतिम निर्णय ले।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद नगर पंचायत मधुबन की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें शासन के अगले कदम और जांच रिपोर्ट के आधार पर होने वाले अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।
