गाजीपुर
बंदरों के आतंक से सहमे ग्रामीण, घरों में कैद होने को मजबूर
बहरियाबाद व आसपास के गांवों में बढ़ा उत्पात, बच्चों और बुजुर्गों में दहशत
फसलों और घरेलू सामान को नुकसान, काटने-खरोंचने की घटनाओं से बढ़ी चिंता; ग्रामीणों ने बंदरों को पकड़ने की मांग की
बहरियाबाद (गाजीपुर)। बहरियाबाद और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बंदरों के बढ़ते आतंक से लोग परेशान हैं। बंदरों के झुंड गांवों में पहुंचकर घरों और आसपास के क्षेत्रों में उत्पात मचा रहे हैं। स्थिति यह है कि सुबह होते ही बंदरों का झुंड देखकर लोग अपने घरों के दरवाजे बंद करने को मजबूर हो रहे हैं।
घर और फसलें बना रहे निशाना
ग्रामीणों के अनुसार, बंदर घरों में घुसकर रसोई का सामान बिखेरने के साथ कपड़े फाड़ रहे हैं। छतों पर लगी पानी की टंकियों, पाइप, डिश एंटीना तथा बिजली और इंटरनेट के तारों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। खेतों और बागों में पहुंचकर बंदर फसलों, सब्जियों और फलों को भी बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा
बंदरों के काटने और खरोंचने से ग्रामीणों में संक्रमण और रेबीज को लेकर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे और बुजुर्ग बंदरों के हमले की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। बंदरों से बचने के प्रयास में लोगों के गिरकर घायल होने की आशंका भी बनी रहती है।
कचरा और खुले में भोजन बना कारण
ग्रामीणों का कहना है कि तेजी से घटते प्राकृतिक आवास और भोजन की कमी के कारण बंदर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। खुले में पड़ा कूड़ा, जूठन और खाद्य सामग्री उन्हें गांवों में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। लोगों द्वारा बंदरों को भोजन खिलाने से भी उनका इंसानों के प्रति डर कम होने की बात कही जा रही है।
बंदर पकड़ने की मांग
बंदरों की बढ़ती संख्या और आतंक से परेशान ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने और आबादी से दूर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने की मांग की है। ग्रामीणों ने कूड़ा प्रबंधन बेहतर करने और सार्वजनिक स्थानों पर बंदरों को भोजन न खिलाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी अपील की है।
