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वाराणसी

लहरतारा में “अमृत कबीर सरोवर” का होगा निर्माण, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेश नाथ जी महाराज ने किया निरीक्षण

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वाराणसी: आध्यात्म और विकास का संगम बनने की ओर बढ़ा कबीर जन्मस्थली परिसर

संत कबीर की धरती पर ऐतिहासिक पहल, ‘अमृत सरोवर’ योजना से होगा कायाकल्प

वाराणसी, । आध्यात्मिक नगरी वाराणसी के पावन कबीर प्राकट्य स्थल लहरतारा में शनिवार को राज्यसभा सदस्य एवं महामंडलेश्वर बालयोगी उमेश नाथ जी महाराज का गरिमामय आगमन हुआ। इस अवसर पर कबीर जन्मस्थली के पीठाधीश्वर महंत गोविंद शास्त्री के मार्गदर्शन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

‘अमृत कबीर सरोवर’ बनेगा आध्यात्म, साहित्य और पर्यावरण का केंद्र

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अपने संबोधन में बालयोगी उमेश नाथ जी महाराज ने कहा कि यह पहल भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अमृत सरोवर’ अभियान के अंतर्गत देशभर में पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, और लहरतारा का यह सरोवर भी उसी कड़ी में एक आदर्श उदाहरण बनेगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में यह सरोवर “अमृत कबीर सरोवर” के रूप में प्रसिद्ध होगा, जहां आध्यात्म, साहित्य और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

जनप्रतिनिधियों और संतों की रही गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, पार्षद संजू सरोज, महानगर उपाध्यक्ष अशोक जाटव, दिनेश दास जी महाराज, विद्यापीठ ब्लॉक प्रमुख प्रवेश पटेल, सर्वेश पटेल सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

वैज्ञानिक तकनीकों से होगा सरोवर का पुनर्जीवन

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि ने परिसर का निरीक्षण कर सरोवर की वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी ली। महंत गोविंद शास्त्री ने बताया कि सरोवर के पुनर्जीवन में वैज्ञानिक तकनीकों, वर्षा जल संचयन और पर्यावरण अनुकूल उपायों को अपनाया जाएगा, जिससे यह स्थल स्थायी रूप से संरक्षित रह सके।

कबीर के विचारों से जुड़ेगा समाज, बनेगा प्रेरणा का केंद्र

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कार्यक्रम में संत कबीर की शिक्षाओं को भी स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कबीर के विचार आज भी समाज को सत्य, प्रेम और समानता का मार्ग दिखाते हैं। “अमृत कबीर सरोवर” न केवल जल संरक्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि यह कबीर के विचारों के प्रचार-प्रसार का भी प्रमुख माध्यम होगा।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें महंत गोविंद शास्त्री ने सभी संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

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