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गोरखपुर

करोड़ों की लागत से लगे हेल्थ एटीएम खुद हुए ‘बीमार’, मरीजों की परेशानी बढ़ी

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गोरखपुर जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर मरीजों को आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए हेल्थ एटीएम अब खुद ही खराब स्थिति में पहुंच गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित ये मशीनें रख-रखाव के अभाव में बेकार होती जा रही हैं। प्रमुख खबर की विस्तृत जानकारी गोरखपुर के खोराबार क्षेत्र से सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, गोरखपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में करीब छह महीने पहले हेल्थ एटीएम लगाए गए थे, लेकिन कम समय में ही अधिकांश मशीनों में तकनीकी खराबी आ गई। कई जगहों पर मशीनों का सॉफ्टवेयर काम नहीं कर रहा है, जिसके कारण ये पूरी तरह बंद पड़ी हैं।

इन हेल्थ एटीएम का मकसद मरीजों को बिना लंबी कतार में लगे पांच से दस मिनट के भीतर बीपी, शुगर, बॉडी मास इंडेक्स, मेटाबॉलिक आयु, हीमोग्लोबिन सहित लगभग 40 तरह की जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना था। मशीनों के खराब हो जाने से मरीजों को दोबारा जिला अस्पतालों में लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच की सुविधा बाधित होने के कारण गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी पैथोलॉजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ की कमी है। इसके अलावा कई केंद्रों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की समस्या भी मशीनों के सही संचालन में बाधा बन रही है।

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हेल्थ एटीएम से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, शरीर का तापमान, ऑक्सीजन लेवल, वजन और लंबाई जैसी महत्वपूर्ण जांचें तत्काल हो जाती थीं, लेकिन मशीनों के खराब होने से ये सभी जांचें प्रभावित हो रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मशीनों के खराब होने की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। जिन कंपनियों ने हेल्थ एटीएम स्थापित किए थे, उन्हें मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के तहत मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कुछ केंद्रों पर इंटरनेट से जुड़ी समस्याओं को भी जल्द दूर करने का दावा किया जा रहा है।

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