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वाराणसी

बौद्ध अनुयायियों ने किए बुद्ध अस्थि अवशेष के दर्शन

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वाराणसी। जनपद के सारनाथ में महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर का 94वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर में रखे भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष के दर्शन के लिए हजारों की संख्या में बौद्ध अनुयायी एकत्र हुए।

विहाराधिपति भिक्षु आर सुमित्ता नन्द थेरो के नेतृत्व में मोती और हीरा जड़ित फ्लास्क में रखे भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष को मंदिर के मुख्य हाल में दर्शनार्थ रखा गया। सोमवार सुबह 5:30 बजे बौद्ध भिक्षुओं द्वारा पूजा-अर्चना की गई और इसके बाद अस्थि अवशेष को श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर श्रीलंका, वियतनाम, थाईलैंड, नेपाल, म्यांमार, श्रावस्ती, लखनऊ, कुशीनगर, बोधगया, लुम्बिनी सहित विभिन्न स्थानों से आए बौद्ध भिक्षु और अनुयायी सुबह 6 बजे से 11 बजे तक बुद्ध अस्थि के दर्शन करते रहे। इस दौरान मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर सारनाथ चौराहे तक लंबी कतारें लगी रहीं।

मंदिर और आसपास के बौद्ध मठों को पंचशील झंडों, रंगीन बिजली की झालरों और फूलों से सजाया गया था। इस अवसर पर महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के महासचिव भिक्षु पी शिबली थेरो, भिक्षु नन्द थेरो, भिक्षु मैत्री, डा. चंद्रशेखर सिंह, प्रवीण श्रीवास्तव, संजय मौर्या, रामधीरज सहित अनेक बौद्ध मठों के भिक्षु उपस्थित रहे।

कार्तिक पूर्णिमा पर दर्शन के बाद लौट रहे श्रद्धालुओं को वियतनामी बौद्ध अनुयायियों द्वारा प्रसाद का वितरण किया गया, जो अपराह्न 2 बजे तक चलता रहा। इस अवसर ने बौद्ध अनुयायियों के बीच एकता, श्रद्धा और भक्ति का भाव उत्पन्न किया।

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यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने बौद्ध संस्कृति और परंपरा को सहेजने का भी कार्य किया। सारनाथ में आयोजित यह वार्षिकोत्सव बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए आस्था और आनंद से परिपूर्ण एक यादगार अवसर बन गया।

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