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चन्दौली

कुर्क जमीन का नहीं हुआ सुपुर्दनामा, खरीदार काबिज, बैंक ऋण में डूबा भूमिधर

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चंदौली। जिले के सदर तहसील क्षेत्र अंतर्गत काजीपुर गांव निवासी राधेश्याम की सात वर्ष पूर्व कुर्क की गई जमीन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। न्यायालय के स्पष्ट आदेश और सरकारी प्रक्रिया के बावजूद न तो उक्त भूमि का सुपुर्दनामा हुआ और न ही किसी के नाम पट्टा, बावजूद इसके जमीन की खरीद-फरोख्त खुलेआम जारी रही। आरोप है कि तहसील प्रशासन की मिलीभगत से दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई, जिससे अब विवाद और पेचीदा हो गया है।

प्रकरण की जड़ गांव के सरयू चौबे से जुड़ी है, जिन्होंने पुरुषोत्तम चौबे के पुत्र राधेश्याम चौबे को गोद लिया था। 1969 में सरयू चौबे की मृत्यु के बाद, जब राधेश्याम नाबालिग थे, उनके जैविक पिता ने कथित रूप से सरयू चौबे की करीब 21 एकड़ जमीन (गाटा संख्या 739, 752, 790) अपने अन्य पुत्रों के नाम दर्ज करा दी।

वर्ष 2012 में राधेश्याम चौबे ने इस कार्रवाई को एसडीएम कोर्ट में चुनौती दी और खतौनी सुधार की याचिका दाखिल की, जो खारिज हो गई। बाद में कमिश्नर कोर्ट से उन्हें राहत मिली और उनका नाम खतौनी में दर्ज कर दिया गया। भाइयों ने इस निर्णय को बोर्ड ऑफ रेवेन्यू और फिर हाईकोर्ट तक चुनौती दी, लेकिन अक्टूबर 2015 में हाईकोर्ट ने स्टे देते हुए स्पष्ट किया कि किसी तीसरे पक्ष की जमीन में दखल न हो।

इस बीच, राधेश्याम चौबे ने उक्त जमीन को गिरवी रख बैंक से ऋण लिया, जो चुकता न हो पाने के कारण अक्टूबर 2018 में जमीन कुर्क कर दी गई। कानून के मुताबिक कुर्क जमीन राज्य सरकार की मानी जाती है, लेकिन प्रशासन द्वारा न तो इसका पट्टा कराया गया और न ही सुपुर्द किया गया।

विडंबना यह रही कि वर्ष 2019 में राधेश्याम ने फिर उसी कुर्क की गई जमीन की बिक्री शुरू कर दी। प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से न केवल बैनामा हुआ बल्कि दाखिल-खारिज भी कर दिया गया। इस घोटाले में तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल और यहां तक कि उस समय के जिलाधिकारी भी सवालों के घेरे में आ चुके हैं।

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फिलहाल रीता सिंह और अनीता सिंह नामक महिलाएं करीब 15 बीघा भूमि पर कब्जा जमाए हुए हैं। उनके पति प्रमोद सिंह और सुधीर सिंह विवादित जमीन पर खेतीबाड़ी कर रहे हैं। एसडीएम दिव्या ओझा ने जमीन पर सरकारी बोर्ड लगवाने का आदेश दिया था, पर उसका पालन अब तक नहीं हुआ।

राधेश्याम चौबे का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि कुर्क की गई भूमि का नियमानुसार पट्टा या सुपुर्दनामा कर बैंक ऋण चुकाया जाए, और साथ ही फर्जी बैनामों को निरस्त कर वर्तमान काबिज लोगों को बेदखल किया जाए।

इस मामले ने प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। एसडीएम दिव्या ओझा का कहना है कि मामला संज्ञान में है, इसमें उचित कार्रवाई की जाएगी।

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