वाराणसी
स्वर्णकार-व्यापारियों ने झालमूड़ी बेचकर जताया विरोध, सरकार से नीति में बदलाव की मांग
वाराणसी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद वाराणसी में पीएम के बयान के विरोध में प्रदर्शन किया गया। देशभर में एक लाख तक सोना खरीदने पर आधार कार्ड की अनिवार्यता के विरोध में स्वर्णकार समाज लामबंद हो गया है।
सरकार के फैसले के विरोध में गलियों तक इसका असर पहुंच गया। पीएम मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार और उद्योगपति नरेंद्र मित्तल जिला मुख्यालय पर अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। स्वर्णकारों ने सड़क पर चना-मूंग बेचते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की।
स्वर्णकारों और कारीगरों ने पारंपरिक आभूषण बनाने वाले ओजारों को दरकिनार कर हाथों में झालमूड़ी के डिब्बे थाम लिए। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में यह विरोध प्रदर्शन अनोखे अंदाज में किया गया। व्यापारी अपनी दुकानों को बंद रखे हुए थे।
व्यापारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद दुकानों पर ग्राहक आने बंद हो गए हैं। इससे न केवल बड़े निवेश, बल्कि उन हजारों कारीगर परिवारों के आर्थिक हितों पर भी असर पड़ा है। प्रतीकात्मक रूप से नाराज व्यापारी चना-पानी बेचकर सरकार को चेतावनी दे रहे हैं कि यदि सरकार की नीतियों और इस कदम के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले समय में काम छोड़कर झलमूड़ी या छोटे-मोटे काम करने को मजबूर होना पड़ेगा।
स्वर्णकार नेता शुभम सेठ ‘गोलू’ ने कहा, “स्वर्ण व्यापार भारत में बेहद एक व्यवस्थित गति से चल रहा था, लेकिन जब किसी भी व्यक्ति का आधार से लिंकिंग अनिवार्य कर दी गई, तो व्यापार में चिंता पैदा हो गई है। उनका कहना है कि इससे सामाजिक भरोसा और ग्राहक संतुष्टि प्रभावित होगी। उनका मानना है कि इससे कारीगरों के काम करने का तरीका और परंपरा दोनों के लिए असुविधा होगी।”
व्यापारियों और कारीगरों ने एक स्वर में मांग की है कि सरकार तुरंत व्यवस्थित और प्रभावित करने वाले ऐसे फैसलों और नियमों को वापस ले। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वर्ण व्यापार से जुड़े हितधारकों की चिंताओं को समझते हुए राहत देनी चाहिए, ताकि बाजार की स्थिति सामान्य बनी रहे।प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचाया जाएगा।
