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वाराणसी

रविवार को होगी नाटी इमली के भरत मिलाप की 481वीं लीला

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वाराणसी। विश्वप्रसिद्ध नाटी इमली के भरत मिलाप की 481वीं लीला 13 अक्तूबर को होगी। श्री चित्रकूट रामलीला समिति 481वें साल नाटी इमली के मैदान में भरत मिलाप की लीला करेगी। लीला समिति ने जिला प्रशासन से मेला स्थल से अतिक्रमण हटवाने और सड़कों को दुरुस्त करने की मांग की है।

श्री चित्रकूट रामलीला समिति के व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि काशी के लक्खा मेले में शुमार भरत मिलाप की लीला में काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह हाथी पर सवार होकर अपने दल-बल के साथ परंपरागत ढंग से लीला में शामिल होंगे।

व्यवस्थापक मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि लीला के प्रारंभ स्थल धूपचंडी से लेकर नाटी इमली, नवापुरा, लोहटिया तक क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और सफाई की जरूरत है। सड़क के किनारे अतिक्रमण और बिजली के झूलते तारों को हटाने की मांग जिला प्रशासन व नगर निगम से की गई है। पुष्पक विमान काशी के यादव समाज के लोग अपने कंधे पर उठाकर तीन से चार किलोमीटर चलते हैं। मार्ग में अव्यवस्था और अतिक्रमण के कारण आयोजन में दिक्कत हो सकती है।

पांच मिनट की लीला में जुटती है लाखों की भीड़

नाटी इमली के ऐतिहासिक मैदान में होने वाले इस विश्वप्रसिद्ध लीला को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त काशी आते हैं। महज 5 मिनट की इस लीला को देखने के लिए नाटी इमली में लाखों की भीड़ जुटती है। इस लीला को देखने के लिए काशी राज परिवार के मुखिया कुंवर अंनत नारायण सिंह भी पूरे शाही ठाठ बाट के साथ आते हैं और लीला का दीदार करते हैं।

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काशी राज परिवार भी इस भरत मिलाप का साक्षी बनता है। पिछले 227 सालों से काशी नरेश शाही अंदाज में इस लीला में शामिल होते रहे। पूर्व काशी नरेश महाराज उदित नारायण सिंह ने इसकी शुरुआत की थी। 1796 में वह पहली बार इस लीला में शामिल हुए थे। तब से उनकी पांच पीढ़ियां इस परंपरा का निर्वहन करती चली आ रही है।

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