गोरखपुर
दिवाली से पहले चमका कारोबार, ढाई करोड़ के मिले ऑर्डर; कारीगरों के खिले चेहरे
गोरखपुर। कारीगरों के अनुसार, लगभग 30 ट्रक टेराकोटा उत्पादों की सप्लाई देश के अलग-अलग शहरों में की जानी है। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित टेराकोटा शिल्पकार राजन प्रजापति ने बताया कि करीब 15 ट्रक उत्पादों के ऑर्डर हैदराबाद, अहमदाबाद, आंध्र प्रदेश, सूरत, राजस्थान, मुंबई और दिल्ली के कई शहरों से पहले ही मिल चुके हैं।
एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल गोरक्षनगरी का टेराकोटा कारोबार अब पूरे देश में चमकने लगा है। हैदराबाद, अहमदाबाद, आंध्र प्रदेश, सूरत, राजस्थान, मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से अब तक सवा दो करोड़ रुपये के टेराकोटा उत्पाद के ऑर्डर मिल चुके हैं।
इससे दिवाली से पहले ही कारोबार चमकने लगा है। कारोबारी दिवाली तक करीब 10 करोड़ के व्यापार की उम्मीद जता रहे हैं। जिले के टेराकोटा कारीगरों के यहां इन दिनों जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है।
ओडीओपी में शामिल टेराकोटा उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है, जिससे कारीगरों के चेहरे खिले हुए हैं। कारीगर अभी से दीये, सजावटी आइटम, मूर्तियां, हाथी और अन्य पारंपरिक उत्पादों को तैयार करने में जुट गए हैं। कारीगरों के अनुसार, लगभग 30 ट्रक टेराकोटा उत्पादों की सप्लाई देश के अलग-अलग शहरों में की जानी है। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित टेराकोटा शिल्पकार राजन प्रजापति ने बताया कि करीब 15 ट्रक उत्पादों के ऑर्डर हैदराबाद, अहमदाबाद, आंध्र प्रदेश, सूरत, राजस्थान, मुंबई और दिल्ली के कई शहरों से पहले ही मिल चुके हैं।
इनमें अहमदाबाद और हैदराबाद से दो-दो ट्रक उत्पाद की डिमांड है। उनका कहना है कि एक ट्रक में लगभग 15 से 20 हजार पीस माल साइज के हिसाब से आता है, जिसकी कीमत पांच से छह लाख रुपये होती है। कारीगरों का कहना है कि बाहर के ऑर्डर सामान्यत: छह महीने पहले ही मिलने लगते हैं, जिससे समय पर उत्पादन और सप्लाई सुनिश्चित करना एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।राजन प्रजापति ने बताया कि इस बार दिवाली तक करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का अनुमान लगाया जा रहा है। टेराकोटा कारीगर विवेश प्रजापति ने बताया कि वैसे हम सब पूरे साल काम करते हैं लेकिन दिवाली के छह महीने पहले से काम बढ़ जाता है ताकि तय समय सीमा के भीतर सभी ऑर्डर पूरे किए जा सकें।
जिले में कई जगह होता है टेराकोटा का व्यापारटेराकोटा के मिट्टी के उत्पादों को बनाने का कारोबार जिले में कई जगह होता है। इसमें सबसे ज्यादा गुलरिहा के औरंगाबाद में कार्य होता है। यहां से देश के ज्यादातर राज्यों में टेराकोटा के उत्पाद भेजे जाते हैं। इसके साथ ही पादरी बाजार, शाहपुर, बशारतपुर आदि जगहों पर भी शिल्पकार टेराकोटा के उत्पाद को बनाते हैं और इसे थोक व फुटकर बाजार में बेचते हैं।
