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वाराणसी

मणिकर्णिका कुंड में स्नान से मिलती है पापों से मुक्ति, श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

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वाराणसी‌। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर माता मणिकर्णिका का भव्य वार्षिक श्रृंगार बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।

इस पावन पर्व पर विशेष दान-स्नान का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु भारी संख्या में शामिल हुए। माता की अलौकिक झांकी इतनी भव्य और मनोहारी थी कि उसे देखकर हर कोई भाव-विभोर हो गया। मंदिर को फूलों, दीपों और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था, जिससे पूरा परिसर दिव्यता से भर गया।

भक्तों ने विधिवत माता का दर्शन-पूजन किया और 56 प्रकार के विशेष भोग अर्पित किए गए, जो पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बना।ऐसी मान्यता है कि मणिकर्णिका कुंड में अक्षय तृतीया के दिन स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और शरीर के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

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इसी आस्था और विश्वास के साथ श्रद्धालु सुबह से ही कुंड पर एकत्रित होने लगे थे। पूरे आयोजन की अगुवाई मणिकर्णिका कुंड के पुजारी आचार्य जयेंद्र नाथ दुबे ने की। उन्होंने सर्वप्रथम विधिपूर्वक पूजन और आरती की, फिर खुद स्नान कर भक्तों को भी पवित्र स्नान का आदेश दिया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर कुंड में स्नान किया और पुण्य अर्जित किया।

स्नान के पश्चात भक्तों ने माता की आरती में भाग लिया और आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन स्थल पर भजन-कीर्तन का भी कार्यक्रम हुआ, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इस पूरे आयोजन ने वाराणसी की आध्यात्मिक परंपरा को और भी गौरवशाली बना दिया। मणिकर्णिका माता की झांकी और कुंड स्नान की यह परंपरा आज भी श्रद्धा, विश्वास और मोक्ष की भावना को जीवित रखे हुए है।

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