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वाराणसी

फर्जी शोध अनुभव के आधार पर प्राचार्यों की नियुक्ति, प्रमाणपत्रों का होगा सत्यापन

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। प्राचार्यों को नियुक्त करने में लगभग 70 फीसदी ने फर्जी शोध अनुभव के प्रमाणपत्रों का सहारा लिया। शासन को शिकायत मिलने के बाद पूरे प्रदेश में नियुक्त 290 प्राचार्यों के प्रमाणपत्रों का दोबारा सत्यापन कराने का आदेश जारी हुआ है।

क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने पूर्वांचल के 10 जिलों के महाविद्यालयों के लिए पत्र जारी कर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई से प्रदेशभर के महाविद्यालयों में हड़कंप मच गया है।

शिकायतकर्ता सलिल कुमार तिवारी ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि विज्ञापन संख्या 49 (वर्ष 2019) के अंतर्गत अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की भर्ती प्रक्रिया में धांधली की गई। लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद 21 जून 2021 को दस्तावेजों का सत्यापन हुआ, लेकिन कई अभ्यर्थियों ने शोध अनुभव संबंधी फर्जी और कूट रचित अभिलेख प्रस्तुत कर चयन प्राप्त कर लिया। 2023 और 2024 में हुई जांच में यह खुलासा हुआ कि लगभग 70 फीसदी ने फर्जी शोध अनुभव का सहारा लिया।

उच्च शिक्षा के शिक्षा निदेशक ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने का आदेश दिया है। संयुक्त निदेशक डॉ. शशि कपूर ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि विज्ञापन संख्या 49 के तहत नियुक्त प्राचार्यों के प्रमाणपत्रों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।

प्रदेश में पहली बार प्राचार्य भर्ती के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। 2019 में विज्ञापन जारी होने के बाद 2021 में परीक्षा, साक्षात्कार और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर नियुक्ति की गई थी। कुल 290 प्राचार्य चुने गए और 65 अभ्यर्थियों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया था।

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क्या बोले अधिकारी
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश वर्मा ने कहा, “विज्ञापन संख्या 49 के आधार पर नियुक्त प्राचार्यों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन का आदेश मिला है। इसके आधार पर पूर्वांचल के 10 जिलों में सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिलेवार सत्यापन कराया जाएगा और प्रबंधकों से रिपोर्ट मांगी जाएगी।”

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