गोरखपुर
चाइनीज मांझे पर पुलिस का महाअभियान, चार दुकानदार गिरफ्तार
झंगहा, सहजनवां, पिपराइच और कैंट में छापेमारी; प्रतिबंधित मांझे की 57 चरखियां व बंडल बरामद
गोरखपुर। प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए गोरखपुर पुलिस ने अभियान तेज कर दिया है। जिले के झंगहा, सहजनवां, पिपराइच और कैंट थाना क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चार दुकानदारों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से अलग-अलग रंगों के चाइनीज और नायलॉन मांझे की खेप बरामद की गई। कार्रवाई से प्रतिबंधित मांझे की बिक्री करने वालों में हड़कंप मच गया।
चार थाना क्षेत्रों में छापेमारी
पुलिस के अनुसार, झंगहा थाना क्षेत्र के अमहिया मुख्य मार्ग स्थित जेपी जनरल स्टोर पर छापेमारी कर दुकानदार आयुष गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। उसकी दुकान से HERO PLUS की आठ चरखियां, GOLD की छह चरखियां और चाइनीज मांझे के सात बंडल बरामद हुए।
सहजनवां थाना क्षेत्र में लुचुई ओवरब्रिज के पास स्थित दुकान से विजय कुमार को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से अलग-अलग रंगों के चाइनीज और नायलॉन मांझे के 26 बंडल मिले।
वहीं, पिपराइच थाना क्षेत्र के क्रांति चौक पर फल का जूस बेचने और छोटी जनरल स्टोर की दुकान की आड़ में प्रतिबंधित मांझा बेचने के आरोप में कामराज गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से विभिन्न रंगों की छह चरखियां बरामद हुईं।
इसी क्रम में कैंट थाना क्षेत्र के शिवपुर तालाब के पास कार्रवाई कर पुलिस ने जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से चाइनीज और नायलॉन मांझे के चार बंडल बरामद किए गए।
कुल 57 चरखियां और बंडल बरामद
चारों थाना क्षेत्रों से पुलिस ने कुल 57 चरखियां और बंडल बरामद किए। इनमें झंगहा से 21, सहजनवां से 26, पिपराइच से छह और कैंट से चार चरखियां व बंडल शामिल हैं। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ संबंधित थानों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए हैं। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
लोगों की सुरक्षा के लिए अभियान
चाइनीज मांझा दोपहिया वाहन चालकों, राहगीरों और पक्षियों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। इससे होने वाली दुर्घटनाओं और मौतों के मद्देनजर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर रोक लगाने की मांग उठती रही है। पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध बिक्री पर अंकुश लगाना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हालांकि, इस अभियान की प्रभावशीलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि प्रतिबंधित मांझे की आपूर्ति करने वालों तक कार्रवाई पहुंचती है या नहीं और बाजार में इसकी बिक्री पर कितनी प्रभावी रोक लग पाती है।
