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वाराणसी

श्री काशी विश्वनाथ धाम में आज से मिलने लगा नया महाप्रसाद

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वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम में आज से (12 अक्टूबर) प्रसादम् की व्यवस्था में बदलाव हुआ है। अब मंदिर परिसर में ही निर्मित प्रसादम् भक्तों को उपलब्ध कराया जाएगा। विजयदशमी के अवसर पर बाबा विश्वनाथ को यह प्रसादम् अर्पित किया गया और मंदिर के काउंटर से इसकी बिक्री शुरू हो गई।

मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा के अनुसार, प्रसाद को बनाने वाले सभी कारीगर हिंदू रिति रिवाज का पालन करेंगे और इसे बनाने वालों को पहले स्नान करना अनिवार्य होगा। 200 ग्राम प्रसाद की कीमत 120 और एक किलोग्राम की कीमत 600 रुपये रखी गई है। प्रसाद छह महीने तक मंदिर परिसर से ही बिकेगा।

मंदिर न्यास ने यह बदलाव प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया है। खासकर तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद के उपजे विवाद के बाद। अब काशी विश्वनाथ धाम में प्रसादम् मंदिर में ही तैयार किया जाएगा और इसे भक्तों के लिए सीधे वहीं से उपलब्ध कराया जाएगा।

प्रसाद निर्माण में मंदिर न्यास द्वारा लिया गया निर्णय –

1. प्रसादम् का निर्माण सिर्फ हिंदू कारीगरों द्वारा किया जाएगा, जो धार्मिक रीति-रिवाजों और मान्यताओं के अनुसार प्रसाद तैयार करेंगे।

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2. कारीगरों के लिए प्रसाद निर्माण से पहले स्नान करना अनिवार्य होगा।

3. प्रसादम् की सामग्री और तैयारी की प्रक्रिया धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन के आधार पर तय की गई है।


शास्त्रों के आधार पर बना नया प्रसादम् –

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्रा के अनुसार, शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन कर नए प्रसादम् की विधि तय की गई है। विद्वानों की एक टीम ने शिव पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के आधार पर प्रसादम् तैयार करने का सुझाव दिया। इसमें चावल के आटे का प्रयोग किया जाएगा, जिसका धार्मिक महत्व भी है।

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बेलपत्र और चावल का धार्मिक महत्व –

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चावल का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं में भगवान कृष्ण और सुदामा के संवाद में भी चावल का उल्लेख मिलता है। साथ ही भगवान शिव को भी चावल के आटे से भोग अर्पित करने की परंपरा रही है। इसी तरह बेलपत्र का भी विशेष महत्व है जिसे धोकर और सुखाकर चूर्ण के रूप में प्रसाद में मिलाया जाएगा।

अमूल कंपनी को मिली जिम्मेदारी –

प्रसादम् के निर्माण और प्रचार-प्रसार का कार्य अमूल कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी ने धार्मिक मान्यताओं और तय मानकों के अनुसार दस दिन का प्रसाद तैयार किया है, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त संस्थाओं से मंजूरी भी मिल चुकी है।

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