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वाराणसी

बालको को उनके मौलिक अधिकारों की जानकारी और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया गया और शिक्षा के महत्व से बच्चों को बताया गया

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राजकीय बालगृह (बालक) रामनगर, राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) रामनगर, वृद्धाश्रम दुर्गाकुंड, शिशु गृह व बालिका गृह लहुराबीर का निगरानी समिति एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिखा यादव ने बुधवार को किया औचक निरीक्षण

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  वाराणसी। जनपद न्यायाधीश डॉ अजय कृष्ण विश्वेश के दिशा-निर्देशन में निगरानी समिति द्वारा राजकीय बालगृह (बालक) रामनगर, राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) रामनगर, वृद्धाश्रम दुर्गाकुंड शिशु गृह व बालिका गृह लहुराबीर का औचक निरीक्षण किया गया।निरीक्षण निगरानी समिति के सदस्यगण रोहित रघुवंशी अपर जनपद न्यायाधीश, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिखा यादव तथा महेंद्र कुमार पांडेय, सिविल जज (सीनियर डिविजन) एचफ0टी0सी0 रहे।
   निगरानी समिति द्वारा बालगृह (बालक) रामनगर गृह की सम्पूर्ण जानकारी ली। प्रभारी अधीक्षक द्वारा यह बताया गया कि इस गृह में कुल 52 बालक निवासित है। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि गृह में मानसिक रूप से विक्षिप्त बालकों हेतु विशेष योग्यता वाली कोई ट्रेनर उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में इस संबंध में अविलंब शासन को पत्र लिखे जाने हेतु निर्देशित किया गया। बाल गृह में बालकों को उनके अधिकारों से परिचित कराते हुए, उन्हें जागरूक किया गया। अधीक्षक द्वारा बताया गया कि सुबह 6:00 से 8:00 बजे तक योगा, व्यायाम व खेलकूद बालकों को कराया जाता है। निरीक्षण के दौरान यह बताया गया कि कोरोना से बचाव हेतु बालकों को मास्क लगाने हेतु व बार-बार साबुन से हाथ धोने के लिए प्रेरित किया जाता है। तदोपरांत निगरानी समिति द्वारा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर), रामनगर का भौतिक निरीक्षण किया गया। इस गृह में निरीक्षण के दौरान अधीक्षक द्वारा  किशोरों की संख्या 46 बतायी गयी। बालको को उनके मौलिक अधिकारों की जानकारी और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया गया और शिक्षा के महत्व से बच्चों को अवगत कराया गया। बच्चों से संबंधित विभिन्न कानूनों की जानकारी दी गई। अधीक्षक को निर्देशित किया गया कि अगर किसी किशोर को विधिक सहायता की आवश्यकता हो तो उनका पत्र लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय को प्रेषित करें, ताकि आवश्यक विधिक सहायता प्रदान की जा सके। बच्चों से उनके खान-पान रहन-सहन व अन्य समस्याओं के बारे में पूछने पर उनके द्वारा कोई शिकायत नहीं की गई। 

किशोरो के शारीरिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए तथा निर्धारित पोष्टिक मीनू के अनुरुप ही किशोरो को भोजन दिया जाता है। यह बताया गया कि किशोरों के कौशल विकास हेतु होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया जा रहा दिया जाता है। निरीक्षण के दौरान प्रशिक्षण दिया जा रहा था । समिति द्वारा प्रशिक्षक को निर्देशित किया गया कि प्रशिक्षण में व्यवहारिक ज्ञान की ओर पर विशेष बल दिया जाए। समिति द्वारा वृद्धा आश्रम, दुर्गाकुंड का भी औचक निरीक्षण किया गया। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिखा यादव द्वारा विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन भी किया गया। निरीक्षण के समय समिति द्वारा वृद्धाश्रम में रह रहे वृद्धजनों एवं उपस्थिति पंजिका का अवलोकन किया गया तथा स्टाॅफ तथा स्टोर में उपलब्ध सामान तथा साफ-सफाई को देखा गया तथा वृद्धों से उनको दिये गये भोजन व नाश्ता के सम्बन्ध में जानकारी ली गयी उनकी समस्याऐं सुनी गयीं। किसी भी वृद्ध के द्वारा स्टाफ/कर्मचारीगण के विरूद्ध कोई भी शिकायत नहीं की गयी है। वृद्धाश्रम में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें वृद्धों के अधिकार व भरण-पोषण, एंव निःशुल्क विधिक सहायता पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शिखा यादव द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक किया गया। सचिव द्वारा वृद्धजनों को उनके संवैधानिक व विधिक अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों को बताया कि यदि किसी पुत्र या पुत्री द्वारा अपने माता-पिता का भरण पोषण नहीं किया जाता है, तो उन वृद्धजनों को अपने परिवारिजनों से भरण- पोषण पाने के अधिकारी है। भरण-पोषण के सम्बन्ध में वृद्धों को बताया कि वर्ष 2007 में एक नया अधिनियम पारीत किया गया है, जिसके अन्तर्गत माता-पिता जिनकी अनदेखी हो और सन्तानहीन वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण का प्रावधान किया गया हो। इस अधिनियम के तहत गठित न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करने की तिथि से 90 दिनों के भीतर राहत दिलवाने का प्रावधान है। इन वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा स्वैच्छिक संगठनों द्वारा भी की जा सकती है। न्यायाधिकरण दावे को मध्यस्थता के लिए भी भेज सकता है या स्वयं निर्णय कर सकता है। यह भी बताया गया कि यदि किसी प्रकार की कानूनी सहायता की आवश्यकता हो तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करायी जाएगी। बैंकों में वृद्धजनों के लिए अलग से लाइन होती हैं। जिससे वृद्ध व्यक्तियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। न्यायालयों में लंबित मुकदमों में वृद्धजनों के मुकदमों को वरीयता के आधार पर सुना जाता है। बेटा-बेटी, पोता, पोती के साथ-साथ बहु व दामाद को भी भरण पोषण के लिए उत्तरदायी बनाए जाने के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान की। निगरानी समिति द्वारा शिशु गृह लहुराबीर तथा बालिका गृह लहुराबीर एवं होप होम चैरिटेबल ट्रस्ट बालिका गृह, महमूरगंज वाराणसी का भी औचक निरीक्षण किया गया ।
इसके अतिरिक्त दिनांक 26, 27, 28 एवं 29 सितंबर को धारा 138 एन0आई0 एक्ट के अंतर्गत आने वाले वादों के निस्तारण हेतु आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के लिए सचिव शिखा यादव द्वारा समस्त बैंक के अधिकारियों व उनके पैनल अधिवक्ताओं के साथ बैठक ली गई तथा उन्हें निर्देशित किया गया कि आगामी विशेष लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण कराने का प्रयास करें। इस संदर्भ में अनिल कुमार- पंचम, अपर जनपद न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ई0सी0 एक्ट की अध्यक्षता में पांचवी प्री- सिटिंग बैठक भी ली गई। जिसमें कुल 06 मामलों मे से 02 मामलों में सफलतापूर्वक सुलह समझौता कराया गया।

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