गोरखपुर
कुशीनगर में सर्पदंश से शिक्षक की मौत पर हंगामा, इलाज में लापरवाही का आरोप
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में परिजनों ने किया प्रदर्शन, तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित
कुशीनगर। जिले के कसया थाना क्षेत्र के महुई खुर्द गांव निवासी संत पुष्पा जूनियर हाईस्कूल के प्रबंधक दिनेश चौधरी की सर्पदंश के बाद मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है। वहीं, चार कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
50 मिनट तक इलाज नहीं मिलने का परिजनों ने लगाया आरोप
परिजनों का आरोप है कि दिनेश चौधरी को सुबह करीब छह बजे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया गया था। उनका दावा है कि मरीज लगभग 50 मिनट तक इमरजेंसी में तड़पते रहे, लेकिन समय पर उपचार शुरू नहीं किया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि इस दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मोबाइल फोन में व्यस्त रहे। उनका कहना है कि समय पर इलाज मिल जाता तो मरीज की जान बच सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
डीएम कार्यालय जाने के दौरान पुलिस से नोकझोंक
दिनेश चौधरी की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। नाराज परिजन शव लेकर जिलाधिकारी कार्यालय की ओर जाने लगे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिस पर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और बहस हुई। घटना के चलते मौके पर कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बाद में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित
मामले को गंभीरता से लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केपी गौंड ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी में डॉ. मृत्युंजय राय, डॉ. मलय श्रीवास्तव और डॉ. कुणाल को शामिल किया गया है। जांच टीम को पांच दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। जांच में इलाज में देरी और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जाएगी।
चार कर्मचारियों को नोटिस, जवाब तलब
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले में ईएमओ डॉ. शुभम प्रसाद और फार्मासिस्ट समेत चार कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है। फिलहाल, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब सभी की निगाहें जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे घटना के कारणों और इलाज के दौरान हुई संभावित लापरवाही की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
