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गोरखपुर

दिवाली से पहले बदलेगी गोरखपुर के विरासत गलियारे की तस्वीर, पांडेयहाता से धर्मशाला बाजार तक दिखेगा नया रंग-रूप

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गोरखपुर। शहर की ऐतिहासिक पहचान को नया स्वरूप देने के लिए पांडेयहाता से धर्मशाला बाजार तक विकसित किए जा रहे विरासत गलियारे का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। दिवाली से पहले इस पूरे मार्ग को आकर्षक और एकरूप रूप देने की तैयारी है। इसके तहत दुकानों और मकानों के बाहरी हिस्सों की रंगाई, वाटरप्रूफिंग और साइनबोर्ड को निर्धारित डिजाइन के अनुरूप व्यवस्थित किया जा रहा है। काम पूरा होने के बाद इस प्रमुख व्यापारिक मार्ग की तस्वीर बदली हुई नजर आने की उम्मीद है।

नारंगी रंग में रंगेंगी दुकानें, सफेद बॉर्डर और काले फ्रेम बढ़ाएंगे खूबसूरती

विरासत गलियारे को खास पहचान देने के लिए दुकानों और मकानों के बाहरी हिस्सों में रंगों का एक समान संयोजन अपनाया जा रहा है। योजना के अनुसार, दुकानों पर नारंगी रंग किया जाएगा, जबकि किनारों पर सफेद बॉर्डर बनाई जाएगी। दरवाजों और खिड़कियों के फ्रेम काले रंग में नजर आएंगे। रंगों का यह संयोजन पूरे बाजार को व्यवस्थित और आकर्षक रूप देने में मदद करेगा।

991 दुकानों के लिए तैयार किया गया डिजाइन

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने विरासत गलियारे की कुल 991 दुकानों के लिए रंगाई, वाटरप्रूफिंग और साइनबोर्ड से संबंधित डिजाइन तैयार किया है। इसका उद्देश्य दुकानों के बाहरी स्वरूप को एकरूप बनाना और पूरे बाजार को व्यवस्थित पहचान देना है। निर्धारित डिजाइन के अनुसार साइनबोर्ड लगाए जाने से दुकानों के सामने का हिस्सा भी अधिक सुव्यवस्थित दिखाई देने की उम्मीद है।

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रंगाई के साथ वाटरप्रूफिंग पर भी जोर

परियोजना के तहत केवल दुकानों की रंगाई ही नहीं, बल्कि बाहरी दीवारों को नमी और पानी के प्रभाव से बचाने के लिए वाटरप्रूफिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे इमारतों की बाहरी सतहों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। रंगाई, वाटरप्रूफिंग और साइनबोर्ड को एक साथ व्यवस्थित करने की योजना से बाजार के समग्र स्वरूप को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

अब तक 25 प्रतिशत काम पूरा, 31 अक्टूबर तक लक्ष्य

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विरासत गलियारे में दुकानों और मकानों की रंगाई का लगभग 25 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जीडीए के अधिकारियों का लक्ष्य रंगाई सहित निर्धारित कार्यों को 31 अक्टूबर तक पूरा करने का है। इसके बाद चार से पांच नवंबर के आसपास पूरे गलियारे का बदला हुआ स्वरूप देखने को मिलने की उम्मीद है।

दिवाली से पहले काम पूरा करने के लिए शेष दुकानों और मकानों पर तेजी से कार्य करने की जरूरत होगी। निर्धारित समयसीमा में काम पूरा होने पर त्योहार के दौरान बाजार से गुजरने वाले लोगों को इसका नया और आकर्षक रूप देखने को मिल सकता है।

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शहर की ऐतिहासिक और व्यापारिक पहचान को मिलेगी नई झलक

पांडेयहाता से धर्मशाला बाजार तक का क्षेत्र गोरखपुर के प्रमुख व्यापारिक इलाकों में शामिल है। ऐसे में विरासत गलियारे का विकास शहर की ऐतिहासिक पहचान और बाजारों के बाहरी स्वरूप के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुकानों और मकानों के लिए एक समान रंग योजना तथा निर्धारित साइनबोर्ड डिजाइन लागू होने से इस मार्ग को अलग पहचान मिल सकती है।

दिवाली पर दिख सकता है बदले बाजार का नजारा

दिवाली से पहले विरासत गलियारे को नया रंग-रूप देने की तैयारी शहरवासियों और बाजार आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का विषय बन सकती है। नारंगी रंग की दुकानें, सफेद बॉर्डर और काले फ्रेम पूरे मार्ग को एक अलग दृश्यात्मक पहचान देंगे। हालांकि, गलियारे की अंतिम तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्धारित समयसीमा में कितना काम पूरा हो पाता है और सभी दुकानों व मकानों पर तय डिजाइन किस तरह लागू किया जाता है।

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