वाराणसी
आकांक्षा दुबे मौत मामले में सीबीआई जांच से हाईकोर्ट का इनकार
चार्जशीट दाखिल होने और मजिस्ट्रेट के संज्ञान लेने का दिया हवाला, मां मधु दुबे की याचिका निस्तारित
वाराणसी/प्रयागराज। भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने अभिनेत्री की मां मधु दुबे की ओर से दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल होने और मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद, बिना प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल किए सीबीआई जांच की मांग का औचित्य नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि शव उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मौत के कारण की दोबारा जांच संभव नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार (द्वितीय) की खंडपीठ ने दिया। आकांक्षा दुबे 26 मार्च 2023 को वाराणसी के सारनाथ स्थित एक होटल के कमरे में मृत मिली थीं। इस मामले में सारनाथ थाने में आत्महत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
स्वतंत्र जांच की उठी थी मांग
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने अदालत में दलील दी कि घटनास्थल की परिस्थितियों, तस्वीरों, कलाई पर चोट के निशान और फॉरेंसिक निष्कर्षों को समग्र रूप से देखने पर आत्महत्या के निष्कर्ष पर गंभीर सवाल उठते हैं। ऐसे में मामले की स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी संवैधानिक अदालत की शक्तियां समाप्त नहीं हो जातीं। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूजा पाल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2016) के फैसले का हवाला दिया गया।
चार्जशीट और संज्ञान का दिया गया हवाला
दूसरी प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता रघुवंश मिश्रा ने अदालत को बताया कि मामले में तीन जून 2023 को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके बाद छह जून 2023 को मजिस्ट्रेट ने भी मामले में संज्ञान ले लिया था।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संबंध में जिलाधिकारी के समक्ष दोबारा चिकित्सकीय जांच की मांग करते हुए कोई आपत्ति दी गई थी? साथ ही, क्या चार्जशीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के भगवंत सिंह बनाम पुलिस आयुक्त (1985) मामले के सिद्धांतों के तहत प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई थी? याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि ऐसी कोई आपत्ति या प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल नहीं की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
हाईकोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ता पक्ष ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। अधिवक्ता सौरभ तिवारी के अनुसार, खंडपीठ के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया जाएगा।
आकांक्षा दुबे की मौत का मामला घटना के समय से ही चर्चा में रहा है। मौत से पहले सोशल मीडिया पर उनका रोते हुए एक वीडियो भी वायरल हुआ था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।
