चन्दौली
आशियाने की तलाश में ब्लॉक परिसर पहुंचे बेसहारा गोवंश
सकलडीहा में व्यवस्थाओं की खुली पोल
ब्लॉक मुख्यालय के गेट पर जमा हुए गोवंश, ग्रामीणों ने चारा-पानी की कमी और बदहाल गो-आश्रय स्थलों पर उठाए सवाल
सकलडीहा (चंदौली)। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गोवंश संरक्षण के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सकलडीहा में सोमवार को सामने आया नजारा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता नजर आया। आश्रय की तलाश में कई बेसहारा गोवंश सीधे सकलडीहा विकास खंड परिसर पहुंच गए और ब्लॉक मुख्यालय के गेट व आसपास के हिस्से में जमा हो गए। गोवंशों के इस तरह ब्लॉक परिसर में पहुंचने से वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।
क्षेत्र में छुट्टा और बेसहारा पशुओं से किसान पहले से परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसलों को बचाने के लिए उन्हें रात-दिन जागकर रखवाली करनी पड़ती है। दूसरी ओर, गोवंशों के लिए बनाए गए अस्थायी गो-आश्रय स्थलों की स्थिति बेहतर नहीं होने के कारण पशु सड़कों और गांवों में भटकने को मजबूर हैं।
चारा-पानी की कमी का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कुछ गो-आश्रय स्थलों पर पर्याप्त चारा और पानी की व्यवस्था नहीं है। बदहाली के कारण गोवंशों को सुरक्षित आश्रय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सोमवार को बड़ी संख्या में बेसहारा पशुओं का ब्लॉक परिसर पहुंचना ग्रामीणों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया।
ग्रामीणों ने कहा कि छुट्टा पशुओं की समस्या को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन प्रभावी समाधान नहीं हो सका। किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए लगातार परेशान होना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि गो-आश्रय स्थलों को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाए तो किसानों के साथ-साथ बेसहारा गोवंशों को भी राहत मिल सकती है।
कर्मचारी बोले नहीं, परिसर में चर्चा तेज
ब्लॉक मुख्यालय जैसे प्रशासनिक परिसर में गोवंशों के पहुंचने को लेकर जब ब्लॉक कर्मियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने इस मामले पर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से परहेज किया। हालांकि, परिसर में मौजूद लोगों के बीच गोवंशों के पहुंचने को लेकर चर्चा होती रही।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ब्लॉक परिसर में पहुंचे बेसहारा गोवंशों को तत्काल उचित गोशालाओं में पहुंचाया जाए। साथ ही क्षेत्र में बंद या बदहाल पड़े गो-आश्रय स्थलों को सुचारू रूप से संचालित कर वहां पर्याप्त चारा-पानी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि बेसहारा पशुओं के साथ किसानों की समस्या का भी स्थायी समाधान हो सके।
