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NEET-UG पेपर लीक में इनसाइडर एंगल की जांच तेज, पुणे-लातूर से दो और गिरफ्तार

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नई दिल्ली। सीबीआई ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच को और तेज कर दिया है। अब एजेंसी का फोकस इस बात पर है कि कहीं इस पूरे प्रकरण में किसी इनसाइडर की भूमिका तो नहीं रही। इसी क्रम में पुणे से एक और संदिग्ध महिला को गिरफ्तार किया गया है, जबकि महाराष्ट्र के लातूर में एक सेवानिवृत्त केमिस्ट्री प्रोफेसर को हिरासत में लिया गया है।

मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या अब सात हो गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि 3 मई को आयोजित परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र तक पहुंच रखने वाली हाई-सिक्योरिटी चेन ऑफ कस्टडी के भीतर से कहीं पेपर लीक तो नहीं हुआ।

सीबीआई ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से उन सभी लोगों का विवरण मांगा है, जिनके पास पेपर सील होने से पहले उसकी पहुंच थी। जांच के दायरे में परीक्षा प्रणाली से जुड़े सभी महत्वपूर्ण चरणों और व्यक्तियों को शामिल किया गया है।

विशेष रूप से NEET प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विषय विशेषज्ञों, पैनल में शामिल प्रोफेसरों और शिक्षकों की भूमिकाओं की गहन जांच की जा रही है। इसके साथ ही प्रश्नपत्र निर्माण की शुरुआत से लेकर अंतिम प्रक्रिया तक का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा में चूक आखिर किस स्तर पर हुई।

पुणे के सुखसागर नगर इलाके से सीबीआई ने मनीषा वाघमारे नामक महिला को गिरफ्तार किया है, जो ब्यूटी पार्लर संचालित करती है। आरोप है कि उसने धनंजय के लिए बिचौलिये के तौर पर काम किया। जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा से पहले उसके खातों में करीब दो दर्जन बैंक खातों से धनराशि भेजी गई थी।

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वहीं, लातूर में हिरासत में लिए गए सेवानिवृत्त प्रोफेसर दयानंद सागर कॉलेज से जुड़े रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वह उस अनुवाद पैनल का हिस्सा थे, जिसने प्रश्नपत्र का मराठी अनुवाद तैयार किया था।

नीट परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित होती है। ऐसे में अनुवाद प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक गोपनीयता बरती जाती है, लेकिन जांच एजेंसियां अब इसी चरण से लीक की आशंका जता रही हैं।

लातूर में एक अभिभावक की शिकायत के बाद मामला और गंभीर हो गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शहर के एक निजी कोचिंग संस्थान द्वारा आयोजित मॉक टेस्ट के 42 प्रश्न सीधे नीट के मूल प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। सीबीआई अब उस कोचिंग संस्थान और गिरफ्तार प्रोफेसर के बीच संबंधों की जांच कर रही है।

राजस्थान में गिरफ्तार तीन संदिग्धों में से एक दिनेश बिवाल पर आरोप है कि उसने लीक हुए पेपर की हार्ड कॉपी को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से साझा किया। आरोप है कि उसे यह पेपर गुड़गांव के यश यादव से मिला था। बाद में उसने यह प्रश्नपत्र पहले अपने बेटे को दिया और फिर सीकर जिले के अन्य छात्रों को बेच दिया।

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत में आरोपितों की रिमांड मांगते हुए सीबीआई ने इसे एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा बताया। एजेंसी ने अदालत को कहा कि देशभर में फैले इस नेटवर्क का खुलासा करने, वित्तीय लेन-देन की जांच करने और डिजिटल साक्ष्य जुटाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। सीबीआई ने यह आशंका भी जताई है कि इस मामले में एनटीए के कुछ अधिकारियों की संलिप्तता हो सकती है।

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